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हाइलाइट्स
इस व्रत को पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है.
हरतालिका तीज को पूजा के समय सुहागन महिलाएं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं.
पीले सिंदूर को सुहाग का प्रतीक मानते हैं और यह माता पार्वती को भी प्रिय है.
इस साल हरतालिका तीज 18 सितंबर दिन सोमवार को मनाई जाएगी. हरतालिका तीज के दिन सुहागन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. यह कठिन व्रतों में से एक व्रत है. इस व्रत को पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है. हरतालिका तीज को पूजा के समय सुहागन महिलाएं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं ताकि उनको अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त हो. उस दिन सुहाग के प्रतीक सिंदूर का भी महत्व होता है. व्रत वाले दिन पीला सिंदूर लगाते हैं, जबकि अन्य दिनों में लाल सिंदूर लगाने की परंपरा है. हरतालिका तीज के दिन महिलाएं पीला सिंदूर क्यों लगाती हैं? पीले सिंदूर का सुहाग से क्या संंबंध है?
हरतालिका तीज को महिलाएं पीला सिंदूर क्यों लगाती हैं?
काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट का कहना है कि स्त्री को शक्ति का स्वरूप माना जाता है. उनमें अपार शक्ति समाहित है. पीले सिंदूर में पारा मिला होता है, जो शीतलता प्रदान करता है. सुहागन महिलएं पीले सिंदूर को लगाती हैं तो मन शांत होता है और शरीर को शीतलता प्राप्त होती है. पीले सिंदूर को सुहाग का प्रतीक मानते हैं और यह माता पार्वती को भी प्रिय है.
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पूजा पाठ, व्रत और त्योहार में पीले सिंदूर की मान्यता है. इस वजह से विवाहित महिलाएं हरतालिका तीज या अन्य त्योहारों पर पीला सिंदूर लगाती हैं. माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री चढ़ाते हैं तो उसमें पीला सिंदूर ही रखना चाहिए. देवी पार्वती और भगवान शिव के आशीर्वाद से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
महिलाएं लाल सिंदूर क्यों लगाती हैं?
ज्योतिषाचार्य भट्ट बताते हैं कि लाल सिंदूर को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. उनको लाल सिंदूर प्रिय है. हिंदू धर्म में पत्नी को लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं, इस वजह से सुहागन स्त्रियां दैनिक जीवन में लाल सिंदूर का उपयोग करती हैं, लेकिन व्रत और त्योहारों में पीले सिंदूर को लगाती हैं.
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हरतालिका तीज पर लाल सिंदूर लगाएं या पीला?
लाल और पीले सिंदूर के धार्मिक महत्व को अब आप जान चुके हैं. हरतालिका तीज का व्रत अखंड सौभाग्य की कामना से करते हैं, इस वजह से हरतालिका तीज के दिन व्रती महिलाओं को पीला सिंदूर ही लगाना चाहिए.
हरतालिका तीज का महत्व
माता पार्वती ने भगवान शिव को पति स्वरूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तप किया था, उसके परिणाम स्वरूप भगवान शिव प्रकट हुए और उनको मनोकामना पूर्ति का वरदान दिया. शिव जी और माता पार्वती का विवाह हुआ, उसके बाद से माता पार्वती को अखंड सौभाग्य प्राप्त हुआ क्योंकि भगवान शिव जीवन और मृत्यु से परे हैं.
कलयुग में माता पार्वती के समान व्रत करना असंभव है, इस वजह से एक दिन का कठोर व्रत हरतालिका तीज के दिन किया जाता है और शिव-पार्वती से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति का आशीर्वाद मांगते हैं.
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Tags: Astrology, Dharma Aastha, Hartalika Teej
FIRST PUBLISHED : September 15, 2023, 12:09 IST
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