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गोरखपुर में पहले सूखा और फिर बाढ़। ऊपर से तेज बारिश। दैवीय आपदा ने गोरखपुर जिले के किसानों की धान की फसल चौपट कर दी। किसान बर्बाद हो गए। कर्ज से दबे किसान फसल नष्ट हो जाने से और कर्जदार हो गए। ऐसे समय में उत्तर प्रदेश की सरकार ने किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने की भरसक पहल की है। शासन ने जिले के ऐसे 17109 किसानों जिनकी धान की फसल बाढ़ में चौपट हो गई थी उन्हें तकरीबन सात करोड़ की मदद दी है।
किसानों ने जब धान की बेहन डाली तो बारिश नहीं हो रही थी। पम्पिंगसेट से सिंचाई कर किसानों ने बेहन को जिंदा रखा। इस उम्मीद में कि बारिश होगी और उनके खेतों में धान की रोपाई हो जाएगी। रोपाई के लिए खेत में बेहन तैयार हो गई लेकिन आसमान में बादल नहीं मडराए। मन मुताबिक बारिश नहीं हुई तो मजबूरन किसानों को पम्पिंगसेट से पानी चलाकर धान की रोपाई करानी पड़ी। किसानों ने धान की फसल को जिंदा रखने के लिए पम्पिंगसेट से पानी चलाया। काफी समय तक बारिश नहीं हुई तो किसानों ने काफी हिस्से की फसल की जुताई कर दी। जितनी फसलों को सिंचाई कर जिंदा रख सकते थे, जिंदा रखा।
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फसल पककर तैयार होने को हुई तो तेज बारिश शुरू हो गई। इधर मूसलाधार बारिश की वजह से किसान खेत में लहलहाती धान की फसल की कटाई नहीं कर पा रहे थे और उधर आखिरी दिनों में राप्ती-रोहिन और सरयू ने खतरे के निशान को पार कर दिया और जमकर तबाही मचाई। जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण के मुताबिक 17109 किसानों को क्षतिपूर्ति के रूप में तकरीबन 7 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
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