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एडसन अरांतेस डो नासिमेंटो यानी पेले का लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद गुरुवार को निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। पेले जब गोल करते थे तो लगता था कि यह कितना आसान है। डिफेंडरों को छकाते हुए ड्रिबल करके गेंद को विरोधी गोल तक ले जाना और दमदार शॉट से या प्रवाहपूर्ण फ्री किक पर या मजबूत हेडर से वह चुटकियों में गोल कर जाते थे। ब्राजील के क्लब सांतोस के लिये उन्होंने एक हजार से अधिक गोल दागे और ब्राजील के लिये 95 गोल किये। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि 1960 के दशक में नाइजीरिया के गृहयुद्ध के दौरान 48 घंटे के लिये विरोधी गुटों के बीच युद्धविराम हो गया ताकि वे लागोस में पेले का एक मैच देख सकें।
पेले के लिए रोका गया युद्ध
पेले ने एक बार खुलासा करते हुए बताया था कि 1967 में जब वह अपने क्लब सांतोस से खेलने के लिए गैबोन आए थे, तो वहां कांगो से युद्ध हो रहा था, जिसके बाद गैबोन के तत्कालीन राष्ट्रपति अली बोंगो ने कांगो के राष्ट्रपति से बात की और पेले का खेल देखने के लिए दोनों देश युद्ध रोकने को राजी हो गए। हालांकि मैच खत्म होने के बाद फिर युद्ध शुरू हो गया था।
1969 में पेले अपने क्लब सांतोस के साथ नाइजीरिया खेलने पहुंचे थे। जहां पर नाइजीरिया और बायफ्रा के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था। जैसे ही पेले पहुंचे तो स्थानीय लोगों को मैच देखने के लिए नदी पर स्थित पुल के दरवाजे खोल दिए गए और दो दिन के लिए युद्धविराम की घोषणा की गई। ब्राजीली क्लब सांतोस और नाइजिरियन सुपर ईगल इलेवन के बीच मुकाबला खेला गया था और पेले ने मैच में गोल भी किया था।
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वहीं पेले की टीम के साथी रहे गिलमार और कोटिन्हो के मुताबिक जैसे ही उन्होंने नाइजीरिया छोड़ा, युद्धविराम समाप्त हो गया। सांतोस के हवाई जहाज से उड़ान भरने के दौरान गोलियों की आवाजें सुनाई देने लगी थी। पेले की लोकप्रियता का आलम यह था कि 1977 में जब वह कोलकाता आये तो मानों पूरा शहर थम गया था। वह 2015 और 2018 में भी भारत आये थे।
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