Home Life Style खोलना चाहते हैं खुद का अस्पताल, ध्यान रखें वास्तु के 5 सरल टिप्स, मरीजों को भी मिलेगा लाभ

खोलना चाहते हैं खुद का अस्पताल, ध्यान रखें वास्तु के 5 सरल टिप्स, मरीजों को भी मिलेगा लाभ

0
खोलना चाहते हैं खुद का अस्पताल, ध्यान रखें वास्तु के 5 सरल टिप्स, मरीजों को भी मिलेगा लाभ

[ad_1]

हाइलाइट्स

हॉस्पिटल या नर्सिंग होम में बनी हुई सीढ़ियां यदि विषम संख्या में हों जैसे 11,15,17,23.

Vastu Tips : हिन्दू धर्म में वास्तु शास्त्र को बहुत अहमियत दी जाती है. ऐसे में नया व्यापार शुरू करते समय भी यदि वास्तु शास्त्र में बताए नियमों का पालन कर लिया जाए, तो व्यापार में वृद्धि और सफलता मिल सकती है. व्यापार या नौकरी में सफलता नहीं मिलने के पीछे वास्तु दोष एक बड़ा कारण हो सकता है. ऐसे में यदि आप खुद का अस्पताल बनवाने की सोच रहे हैं, तो आपको वास्तु शास्त्र के बताए नियमों का पालन करना बहुत जरूरी हो जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार कई चीजें हैं जिन्हें नया व्यापार शुरू करते समय ध्यान में रखना बहुत जरूरी है. भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं अस्पताल बनवाते वक्त वास्तु के किन नियमों का पालन करना लाभकारी हो सकता है.

-दिशाओं को दें महत्त्व
मरीजों के हित और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए हॉस्पिटल में नर्सिंग रूम, नर्सिंग होम के लिए वास्तु के नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक है. इसलिए हॉस्पिटल का मुख्य द्वार पूर्व या उत्तर दिशा में होना सबसे शुभ होता है. डॉक्टर का परामर्श उत्तर दिशा में, ऑपरेशन थिएटर पश्चिम दिशा में, कैश काउंटर दक्षिण पश्चिम दिशा में और मरीजों के साथ आए हुए परिजनों के लिए वेटिंग रूम दक्षिण दिशा में रखना चाहिए.

यह भी पढ़ें – क्या आप भी खाते हैं भंडारे का खाना? हो जाएं सावधान, बन सकते हैं पाप के भागी

हॉस्पिटल में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रॉनिक मशीन जैसे एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई आदि के लिए दक्षिण पूर्व दिशा सर्वोत्तम मानी जाती है. मरीजों के लिए एक जनरल एवं प्राइवेट कक्ष उत्तर, पश्चिम अथवा उत्तर पश्चिम दिशा में होने चाचाहिए.यदि आपका हॉस्पिटल दो या दो से अधिक मंजिल का है. तो ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां पश्चिम, उत्तर- पश्चिम, उत्तर-दक्षिण या दक्षिण पूर्व दिशा में बनवाई जा सकती हैं.

इसके अलावा वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि हॉस्पिटल या नर्सिंग होम में बनी हुई सीढ़ियां यदि विषम संख्या में हों जैसे 11,15,17,23. इन जगहों पर यानी उत्तर पूर्व दिशा में सीढ़ियों का निर्माण नहीं कराना चाहिए. हॉस्पिटल नर्सिंग होम के मध्य भाग को सदैव खाली रखना चाहिए. हॉस्पिटल में मंदिर या पूजा स्थल उत्तर पूर्व दिशा में बनवाना उत्तम होता है. पीने के पानी की व्यवस्था भी उत्तर पूर्व दिशा में ही होनी चाहिए.

यह भी पढ़ें – अपनाएं सुपारी के 4 सरल उपाय, दूर होगी हर परेशानी, जीवन में बनी रहेगी खुशहाली

-रंगों का भी है महत्व
हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम की दीवारों पर सफेद या हल्का नीला रंग होना चाहिए. मरीजों के लिए इस्तेमाल में होने वाले बेड पर चादर का रंग सफेद और ओढ़ने के लिए कंबल का रंग लाल हो, तो यह शुभ होता है. खिड़कियों और दरवाजों पर हरे रंग के पर्दे लाभकारी होते हैं. हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम में सही रंगों का प्रयोग मरीजों को प्रसन्न और स्वस्थ रखने में मदद करता है. इसलिए हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम के कर्मचारियों को रंग-बिरंगे कपड़े पहनने से परहेज करना चाहिए.

[ad_2]

Source link