Home Life Style ‘बूढ़ दादी’ रेस्टोरेंट के जरिए पहाड़ी व्यंजनों को नए फ्लेवर में परोस रहीं दीपिका, नई पीढ़ी भी को भी होगा जुड़ाव

‘बूढ़ दादी’ रेस्टोरेंट के जरिए पहाड़ी व्यंजनों को नए फ्लेवर में परोस रहीं दीपिका, नई पीढ़ी भी को भी होगा जुड़ाव

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‘बूढ़ दादी’ रेस्टोरेंट के जरिए पहाड़ी व्यंजनों को नए फ्लेवर में परोस रहीं दीपिका, नई पीढ़ी भी को भी होगा जुड़ाव

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हिना आजमी/देहरादून. आज की युवा पीढ़ी चाइनीस फूड के पीछे ज्यादा भागती है. पहाड़ के व्यंजनों को नए फ्लेवर में परोसने के लिए देहरादून की दीपिका ‘बूढ़ दादी’ ट्रेडिशनल फूड नामक एक रेस्टोरेंट चला रही है और लोगों को पहाड़ की मिट्टी से जोड़ने का काम कर रही है.

News 18 Local से बातचीत में दीपिका डोभाल ने बताया कि उन्होंने लॉकडाउन में देखा कि उनकी बच्चे घर का साधारण खाना नहीं खाना पसंद कर रहे थे और फिर उन्होंने उस दौरान उन्हें मडुवे और पहाड़ के अनाजों के द्वारा नए-नए डिशेज बना कर खिलाना शुरू किया.

यह फूड बच्चों को पसंद आया और साथ ही बाकी लोग भी उसे पसंद करने लगे जिसके बाद उनके दिमाग में यहीं से आईडिया आया कि उन्हें एक ऐसी शुरुआत करनी चाहिए जिससे पहाड़ के अनाजों को शहरों में भी बढ़ावा मिले और इसी के साथ ही पहाड़ के किसानों को इसका फायदा मिल सके और हमारी पहाड़ की संस्कृति से शहर के लोग भी जुड़ाव महसूस कर सकें.

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‘गहत की दाल पथरी में फायदेमंद’
दीपिका ने बूढ़ दादी नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया और पहाड़ के व्यंजनों को नए फ्लेवर में लोगों तक पहुंचाना शुरू किया. दीपिका का कहना है कि देहरादून के लोगों में देखा जाता है कि उन्हें पथरी की समस्या बहुत होती है और गहत की दाल उसमें बहुत फायदेमंद होती है.

इसीलिए हमने ढिंढके में गहत की स्टफिंग की और घी के साथ उसे परोसना शुरू किया. पुराने वक्त में बूढ़ दादी यानी बुजुर्ग महिलाएं ढिंढके को साधारण तरीके से एक गुठली के रूप में बनाती थी और घी के साथ उसे खाया जाता था दीपिका का मानना है कि आज के वक्त में अगर बच्चों को वह खिलाया जाएगा तो वह नहीं खाएंगे इसीलिए उन्होंने इसमें कुछ नयापन लाने के लिए गहत का इस्तेमाल किया.

पहाड़ की संस्कृति को कर रहीं जीवंत
इसी तरह उन्होंने बदलपुर की बिरंजी, सिड़कू, असकली, बारानाजा खाजा आदि बनाकर परोस रहे हैं. उत्तराखंड के लोकगायक प्रीतम भरतवाण ने भी बूढ़ दादी के व्यंजनों का स्वाद लेते हुए कहा कि तीलु रौतेली और माधव सिंह भंडारी जैसे दिग्गज लोग इन्हीं पहाड़ी अनाजों का सेवन करते थे और उन्होंने अपने क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन किया. इसीलिए हमें अपने खान-पान और वेशभूषा को नहीं भूलना चाहिए अपनी संस्कृति को हमेशा याद रखना चाहिए.

कैसे आप भी बूढ़ दादी के व्यंजनों का ले सकते हैं स्वाद ?
अगर आप भी पहाड़ के व्यंजनों का स्वाद नए फ्लेवर में लेना चाहते हैं तो आप देहरादून के मोहकमपुर खुर्द स्थित ‘बूढ़ दादी’ नामक दुकान से अपनी मनपसंद के कोई भी चीज ले सकते हैं.

Tags: Dehradun news, Uttarakhand news

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