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Delhi Nursery Admission 2022-23: दिल्ली के निजी स्कूल ईडब्ल्यूएस श्रेणी के बच्चों को दाखिला देने में मनमर्जी नहीं कर सकेंगे। स्कूलों को शिक्षा निदेशालय द्वारा ड्रॉ के माध्यम से चयनित हुए बच्चों को दाखिला देना ही होगा। दाखिला न देने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा निदेशालय कार्रवाई करेगा। निदेशालय के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार के पक्ष में आदेश जारी किया है। इसके तहत निजी स्कूल अब निदेशालय द्वारा ड्रा के माध्यम से चुने हुए ईडब्ल्यूएस श्रेणी के बच्चों को दाखिला देने से मना नहीं कर सकेंगे। इस आदेश से गरीब परिवारों को राहत मिलेगी।
बता दें कि वर्तमान में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अपने यहां कुल सीटों के 25 फीसदी पर आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को दाखिला देने का प्रावधान है। हर साल सत्र से पहले निजी स्कूल शिक्षा निदेशालय को अपने यहां प्रवेश कक्षाओं की सीटों की संख्या बताते हैं। उसके बाद निदेशालय कुल सीटों के 25 फीसदी पर दाखिला के लिए आवेदन मांगता है। फिर ड्रा के माध्यम से पारदर्शी तरीके से ईडब्लयूएस दाखिला के लिए बच्चों का चयन किया जाता है। लेकिन कई स्कूल इसका पालन नहीं कर रहे थे, जिसकी शिकायत अभिभावकों ने शिक्षा निदेशालय से की थी।
उच्च न्यायालय ने दलीलों पर विमर्श किया
इस मामले के कोर्ट में जाने के पश्चात दिल्ली उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विमर्श किया। शुक्रवार को यह आदेश जारी हुआ कि निजी स्कूल अब ड्रा में चयनित बच्चों को दाखिला देने से मना नहीं कर सकेंगे। स्कूल द्वारा घोषित कुल सीटों के 25 फीसदी पर उन्हें ईडब्ल्यूएस श्रेणी के बच्चों को दाखिला देना ही होगा। दाखिला देने से मना करने वाले स्कूलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कारवाई की जाएगी।
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