Home National कंपाउंडर से कैसे कुख्यात अपराधी बन गया संजीव जीवा, 90 के दशक में फैला दी थी सनसनी, पढ़िए पूरी क्राइम हिस्ट्री

कंपाउंडर से कैसे कुख्यात अपराधी बन गया संजीव जीवा, 90 के दशक में फैला दी थी सनसनी, पढ़िए पूरी क्राइम हिस्ट्री

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कंपाउंडर से कैसे कुख्यात अपराधी बन गया संजीव जीवा, 90 के दशक में फैला दी थी सनसनी, पढ़िए पूरी क्राइम हिस्ट्री

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 कुख्यात संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की आपराधिक कहानी एक दवाखाने से शुरू होती है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि मुजफ्फरनगर (अब शामली) के बाबरी थाना क्षेत्र के गांव आदमपुर का रहने वाला संजीव जीवा पेशेवर अपराधी बनने से पहले मुजफ्फरनगर शहर के शंकर दवाखाने में कंपाउंडर था। मामूली नौकरी थी। बस, किसी बात पर दवाखाने के संचालक राधेश्याम से उसकी ठन गई और उसने उसी को अगवा कर लिया। यहीं से उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा और जमीनों पर कब्जे करने, रंगदारी मांगने और हथियारों का नेटवर्क बनाने में वह आगे बढ़ता गया।

कोलकाता के कारोबारी से मांगी थी दो करोड़ की रंगदारी : 

संजीव जीवा ने 90 के दशक में दो करोड़ की रंगदारी मांगकर सनसनी फैला दी थी। अपराध की दुनिया में अपना खौफ पैदा करने के लिए संजीव जीवा ने कोलकाता के एक कारोबारी के बेटे का अपहरण कर लिया था। फिरौती में दो करोड़ की रकम मांगी थी, उस समय दो करोड़ बहुत बड़ी रकम होती थी। इसके बाद जीवा हरिद्वार के नाजिम गैंग में घुसा और फिर सतेंद्र बरनाला के साथ जुड़ गया। बाद में उसने अपना गैंग बना लिया।

17 मुकदमों में हो चुका था बरी 

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा पर दो दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से 17 मामलों में संजीव बरी हो चुका था, जबकि उसकी गैंग में 35 से ज्यादा सदस्य हैं। वहीं, संजीव पर जेल से भी गैंग ऑपरेट करने के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में मुजफ्फरनगर और शामली में उसकी संपत्ति भी प्रशासन ने कुर्क की थी।

गोल्डी हत्याकांड में उम्रकैद 

जीवा पर वर्ष 2017 में कारोबारी अमित दीक्षित उर्फ गोल्डी हत्याकांड में भी आरोप लगे थे, इसमें जांच के बाद अदालत ने जीवा समेत 4 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जीवा फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद था।

पत्नी पायल लड़ चुकी है चुनाव :

वर्ष 2021 में जीवा की पत्नी पायल ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर कहा था कि उसके पति की जान को खतरा है। पायल ने 2017 के विधानसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर की सदर सीट से रालोद के टिकट पर चुनाव भी लड़ी थीं, मगर हार गई थी।

 

संजीव जीवा की क्राइम हिस्ट्री


नाम – संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा

पत्नी- पायल माहेश्वरी(2017 विधानसभा चुनाव में पत्नी पायल रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ी और हार गई)

मूल निवासी- शामली में बाबरी थाना क्षेत्र का गांव आदमपुर

वर्तमान पता- प्रेमपुरी कॉलोनी, मुजफ्फरनगर  

गैंग- खुद का बड़ा गैंग और मुख्तार अंसारी का शूटर, मुन्ना बजरंगी और उत्तराखंड के कई गैंग से संबंध

अपराध माफिया- यूपी के 65 अपराध माफिया की लिस्ट में शामिल

गैंगस्टर-  कई बार गैंगस्टर की हुई कार्रवाई

कार्रवाई- चार करोड़ की प्रॉपर्टी प्रशासन ने की थी जब्त

मुकदमों की संख्या- 25

बरी हुआ- 17

गैंग में सदस्य – 50 से ज्यादा

बड़ी वारदात- कृष्णानंद राय हत्याकांड में नाम सामने आया, ब्रह्मदत्त हत्याकांड में भी नाम का खुलासा

अपहरण – कोलकाता के व्यापारी के बेटे का अपहरण कर 1992 में वसूली दो करोड़ की फिरौती

इन गैंग से जुड़ा नाम- हरिद्वार का नाजिम गैंग, सतेंद्र बराला, जितेंद्र भूरी, रमेश ठाकुर, रवि प्रकाश, मुन्ना बजरंगी

 

बागपत : मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद डर गया था संजीव जीवा

9 जुलाई 2018 को बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद संजीव जीवा भी दहशत में आ गया था। लखनऊ जेल में बंद रहने के दौरान संजीव जीवा को भी बजरंगी की तरह अपनी हत्या किए जाने का डर सता रहा था। इसे लेकर संजीव की पत्नी पायल माहेश्वरी ने इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पति को सुरक्षा दिलाने की मांग की थी। पिछले दिनों पायल ने मुख्य न्यायधीश को पत्र लिखकर यही मांग की थी। संजीव जीवा पूर्वांचल के कुख्यात माफियाओं की नजर में उस समय चढ़ा था जब उसने भाजपा विधायक कृष्णनंद राय की सरेआम हत्या कर दी थी। पूर्वांचल के ये डॉन संजीव को अपने साथ मिलाने के लिए जुगत भिड़ा ही रहे थे कि उसने मुन्ना बजरंगी से हाथ मिला लिया। इसके बाद मुख्तार अंसारी का भी खास बन गया। संजीव जीवा की हत्या के बाद पूर्वांचल के माफियाओं की धमक वेस्ट यूपी में लगभग खत्म हो चुकी है।

 

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