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लखनऊ जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा को भी अपनी जान का खतरा सताने लगा था। उसकी पत्नी पायल ने भी कोर्ट से पति की सुरक्षा की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने संजीव को बुलेट प्रूफ जैकेट पहनने की अनुमति दी थी। तब से वह हमेशा जैकेट पहनकर ही पेशी पर आता था। बुधवार को कोर्ट में पेशी पर जाने के लिए वैन से उतरा तो जैकेट नहीं पहनी। हालांकि जैकेट साथ लाया था। पुलिस वालों का कहना है कि जीवा ने कहा कि गर्मी बहुत है। आज नहीं पहनेगा। बिना जैकेट वह गया। सुरक्षाकर्मी भी उसे कोर्ट रूम में करके बाहर आ गए।
आरोप अधिवक्ताओं ने कहा, कोर्ट परिसर की औचक जांच नहीं होती
कोर्ट परिसर में वारदात की वकीलों ने कड़े शब्दों में निंदा की है। उनका कहना है कि कोर्ट में अधिवक्ता, वादकारी सुरक्षित नहीं हैं। कहा है कि उच्च न्यायालय एवं प्रदेश बार काउंसिल ने स्पष्ट कहा है कि कोर्ट के अंदर वकील की ड्रेस में आने वाले लोगों की औचक चेकिंग की जाए, जिसमें स्थानीय बार एसोसिएशन सहयोग करेगा। मगर कभी ऐसी औचक जांच नहीं की गई। सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील द्विवेदी, महामंत्री बृजेश यादव, लखनऊ बार एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेश पांडेय, कुलदीप नारायण मिश्रा, राजेश श्रीवास्तव ने सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता करने की मांग उठाई है।
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अनदेखी बंदियों की गाड़ी आते ही मिलने के लिए घेर लेते हैं मुलाकाती
अदालतों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट के समक्ष रिट याचिका काफी समय से लंबित है। इसमें कोर्ट ने सरकार, पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है। कोर्ट की सुरक्षा, निगरानी के लिए कोर्ट प्रशासन, जनपद न्यायाधीशों ने कड़े निर्देश भी दिए हैं लेकिन पालन नहीं होता। न्यायाधीश के पूर्व आदेश के अनुसार कोर्ट परिसर में किसी को भी असलहा लेकर प्रवेश प्रतिबंधित है। जेल से बन्दियों की गाड़ी से 50 कदम परिधि में मुलाकाती के न आने का निर्देश है। हवालात में तैनात पुलिसकर्मियों की उदार नीति से जैसे ही बंदियों की गाड़ी आती है, सैकड़ों लोग घेर लेते हैं। ऐसी स्थिति में किसी भी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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