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निकायों में आउटसोर्सिंग पर कर्मियों को रखने के नाम पर लंबा खेल चल रहा है। इसका अंदाजा उनके द्वारा ऐसे कर्मियों की जानकारी ऑनलाइन फीड करने से कतराने से लगाया जा सकता है। ऑनलाइन डेटा फीड करने वाली कंपनी ने इस पर आपत्ति जताई है। उसने कहा है कि निकायों में करीब 1.5 लाख ऐसे कर्मियों की संख्या बताई जा रही है, लेकिन जानकारी सिर्फ 55214 की दी गई है।
लखनऊ में तीन साल में बढ़े पांच हजार कर्मी
जरूरत के आधार पर समूह ‘ग’ व ‘घ’ के साथ आउटसोर्सिंग पर सफाई कर्मियों को रखने की व्यवस्था दी गई है। सूत्रों का कहना है कि इस सुविधा का निकायों में खूब फायदा उठाया जा रहा है। मनमाने तरीके से कर्मियों को रखकर इनके मानदेय पर लाखों बहाया जा रहा है। लखनऊ नगर निगम का ही उदाहरण लें तो तीन साल में पांच साल से अधिक कर्मचारी बढ़ गए। वर्ष वर्ष 2017 में 6270 ऐसे कर्मी थे। वर्ष 2018 में 8156 हो गए और वर्ष 2022 में इनकी संख्या 11532 तक पहुंच गई।
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गड़बड़ी रोकने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था
शासन ने गड़बड़ी रोकने के लिए निकायों में आउटसोर्स पर रखे गए कर्मियों का ब्यौरा ऑनलाइन फीड कराने का काम शुरू कराया है। यह काम मेकटोई टेक्नोलॉजीस को दिया गया है। कंपनी के निदेशक पुष्पेंद्र पाल ने स्थानीय निकाय निदेशालय को लिखे पत्र में कहा है कि सभी श्रेणी के आउटसोर्सिंग कर्मियों का ऑनलाइन डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसके लिए साफ्टवेयर बनाया गया है। प्रदेश के 762 निकायों ने 18886 समूह ‘ग’ व ‘घ’ और 36328 सफाई कर्मियों का पोर्टल पर दिया है, जबकि प्रदेश में इनकी अनुमानित संख्या 1.50 लाख के आसपास है। इसलिए सभी का डेटा उपलबध कराया जाए।
निदेशालय ने जताई नाराजगी
स्थानीय निकाय निदेशालय के सहायक निदेशक लेखा अखिल सिंह ने सभी निकायों को पत्र लिखते हुए इस पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि एक सप्ताह के अंदर ऐसे सभी कर्मियों का डेटा उपलब्ध करा दिया जाए, जिससे उसे ऑनलाइन करते हुए ई-वेतन पोर्टल के माध्यम से उन्हें मानदेय दिया जा सके।
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