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नौ महीने का प्रोग्राम
तीन अरब डॉलर वाला नया और छोटी अवधि का प्रोग्राम अब पाकिस्तान के लिए आईएमएफ ने शुरू कर दिया है। वहीं 6.5 अरब डॉलर वाला कार्यक्रम असफल रूप से समाप्त हो गया। नौ महीने के समय के लिए पाकिस्तान को तीन अरब डॉलर मिलेंगे। देश फिलहाल डिफॉल्ट से बच गया है लेकिन यह स्थिति कब तक रहेगी यह बड़ा सवाल है। तेजी से गिरते मुद्राभंडार को स्टाफ लेवल एग्रीमेंट से कुछ सहारा मिल सकता है। साल 2019 में 6.5 अरब डॉलर वाले 23वें कर्ज प्रोग्राम को मंजूरी मिली थी। आजादी के 75 साल में पाकिस्तान 23 बार आईएमएफ के पास मदद के लिए पहुंचा है।
18 बार आईएमएफ ने दी छूट
पहली बार सन् 1958 में पाकिस्तान ने आईएमएफ से मदद मांगी थी यानी आजादी के ठीक 11 साल बाद। 18 बार उसे आईएमएफ की तरफ से छूट दी गई है। सन् 1990 के बाद से मुल्क ने 11 बार अंतरराष्ट्रीय संगठन से मदद मांगी। आईएमएफ अधिकारी नाथन पोर्टर ने इस नए समझौते का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि नया एग्रीमेंट साल 2019 के विस्तारित फंड सुविधा-समर्थित कार्यक्रम पर आधारित है। पोर्टर ने अपने बयान में यह बात भी कही कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को हाल के दिनों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इन चुनौतियों में पिछले साल विनाशकारी बाढ़ और यूक्रेन में युद्ध के बाद जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी शामिल है।
गहरा रहा है आर्थिक संकट
पाकिस्तान में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। देश में मुद्रास्फीति दर मई में करीब 38 फीसदी रिकॉर्ड हुई है। देश पिछले कई सालों से अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए संघर्ष कर रहा है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल देश का विदेशी मुद्रा भंडार इस स्तर तक गिर गया कि यह तीन हफ्ते से भी कम आयात को कवर कर सकता है। देश की राजनीतिक अस्थिरता ने भी बाजार को हिला दिया है। पिछले वर्ष की तुलना में डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपए में करीब 40 फीसदी की गिरावट हुई है।
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