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Domariyaganj Lok Sabha Seat: यूपी के पूर्वी छोर पर भारत-नेपाल सीमा के सटा यह जिला शाक्य जनपद के खंडहरों के लिए मशहूर है। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बनी के लिए भारत होकर जाने वाले ज्यादातर पर्यटक यही रूट लेते हैं। इस सीट पर मुस्लिम वोटरों का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। जीत की हैट्रिक लगा चुके जगदम्बिका पाल यहां से भाजपा के सांसद हैं जो 2009 में कांग्रेस के टिकट पर भी इस क्षेत्र से लोकसभा पहुंचे थे। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में जीत के दावे के साथ बीजेपी जहां अभी से अपनी तैयारियों में जुट गई है। वहीं विपक्ष भी एका के बल इस बार परिणाम बदलने का दम भर रहा है।
जिले के रूप में सिद्धार्थनगर का गठन करीब तीन दशक पहले हुआ था लेकिन यह इलाका छठी शताब्दी ईशा पूर्व से ही अस्तित्व में है इसके पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं। गौतमबुद्ध की जन्मस्थली के करीब होने के साथ ही उनकी क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु इसी जिले का हिस्सा है। दुनिया के पहले गणतंत्र की शुरुआत भी यहीं कपिलवस्तु में हुई थी। कपिलवस्तु शाक्य गणराज्य की राजधानी रही है। हालांकि यह भी उतरना ही सच है कि इतनी समृद्ध विरासत के बावजूद दशकों तक इस क्षेत्र उसका जायज हक नहीं मिल पाया। आम लोगों से लेकर हुकूमत तक इस ओर से उदासीन ही रही। सिद्धार्थनगर का गौरवबोध किताबों तक ही सीमित रह गया।
लगातार तीन चुनाव जीत चुके हैं जगदम्बिका पाल
जगदम्बिका पाल पहले कांग्रेस फिर बीजेपी से इस सीट पर जीतते रहे। साल-2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बसपा उम्मीदवार मोहम्मद मुकीम को हराया था। उस चुनाव में जगदम्बिका पाल को करीब 32 फीसदी वोट मिले थे। उन्हें कुल 2 लाख 98 हजार 845 वोट मिले थे। बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद मुकीम को 1 लाख 95 हजार 257 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। उस चुनाव में कुल 17 उम्मीदवार मैदान में थे।
चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस छोड़ बीजेपी में हुए थे शामिल
जगदम्बिका पाल 2014 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उनके पार्टी छोड़ते ही कांग्रेस पांचवें स्थान पर खिसक गई। जगम्बिका पाल को जहां 32 फीसदी वोट मिले थे वहीं बसपा के मो.मुकीम को 20 फीसदी। जबकि समाजवादी पार्टी के माता प्रसाद पांडेय 18 फीसदी वोटों पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। जबकि कांग्रेस की वसुंधरा को सिर्फ 9 फीसदी वोट ही मिल पाए थे। उस चुनाव में पीस पार्टी के डॉ.अयूब खान भी उम्मीदवार थे। उन्हें कुल 10 फीसदी वोट मिले थे। वह चौथे स्थान पर थे।
जगदग्बिका पाल ने बीजेपी से अपनी जीत का सिलसिला 2019 में भी कायम रखा। 2019 में उन्हें कुल 4,92,253 (49.96%) वोट मिले थे। जबकि सपा-बसपा गठबंधन की ओर से बीएसपी के उम्मीदवार आफताब आलम को 3,86,932 वोट (39.27%) मिले थे। इस तरह जगदम्बिका पाल ने आफताब आलम को 105321 वोटों के अंतर से हरा दिया था। कांग्रेस के डॉ.चंद्रेश उपाध्याय को 60,549 वोट (6.15%) वोट मिले थे।
कब कौन बना सांसद
डुमरियागंज को साल 1957 में बस्ती-गोंडा लोकसभा क्षेत्र से अलग किया गया था। उस साल हुए आम चुनाव में कांग्रेस के रामशंकर लाल जीते थे। साल-1962 में जनसंघ के नारायणस्वरूप शर्मा ने पहली बार कांग्रेस को हराया। हालांकि अगले चुनाव में ही एक बार फिर कांग्रेस की वापसी हुई और केडी मालवीय यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 16 वीं लोकसभा तक इस क्षेत्र से कभी सपा, कभी बसपा तो कभी जनता दल उम्मीदवार चुनाव जीतते रहे। 2009 से लगातार जगदम्बिका पाल यहां से सांसद हैं।
विधानसभा सीटों का समीकरण
डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र डुमरियागंज, शोहरतगढ़, कपिलवस्तु, बांसी और इटवा आते हैं। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में डुमरियागंज से समाजवादी पार्टी की सईदा खातून ने भाजपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह को 771 वोटों से हरा दिया। शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की सहयोगी अपना दल के उम्मीदवार विनय वर्मा ने जीत दर्ज की। कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के श्याम धानी, बांसी सीट से भाजपा के जयप्रताप सिंह और इटवा क्षेत्र से सपा के माता प्रसाद पांडेय ने जीत हासिल की थी।
जातीय समीकरण
डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र में मुसलमान वोटरों की अच्छी-खासी तादाद है। बताया जाता है कि कुल करीब 54 फीसदी आबादी हिंदुओं की और 43 मुस्लिम मुस्लिमों की है। 2019 के चुनाव में यहां कुल 9,85,269 (52.28%) मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था।
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