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18 साल के रमेशबाबू प्रगनानंद ने सोमवार 21 अगस्त को इतिहास रच दिया। वे चेस वर्ल्ड कप 2023 के फाइनल में पहुंच गए हैं। इस इतिहास को स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाने का मौका भी उनके पास है, क्योंकि वे 21 साल के बाद भारत को FIDE वर्ल्ड कप में जीत दिला सकते हैं। भारत चेस वर्ल्ड कप तब जीता था, जब आर प्रगनानंद का जन्म भी नहीं हुआ था। ऐसे में ये टीनएजर देश को एक और खिताब दिलाने की दहलीज पर पहुंच गया है।
भारत ने आखिरी बार चेस वर्ल्ड कप 2002 में जीता था। उस दौरान विश्वनाथन आनंद ने देश को विश्व विजेता बनाया था। उस समय तक भारत के ग्रैंडमास्टर प्रगनानंद का जन्म भी नहीं हुआ था। सन 2000 में भी विश्वनाथन आनंद वर्ल्ड कप जीतने में सफल हुए थे। इसके बाद से कोई भी भारतीय टॉप 4 में भी नहीं पहुंच पाया है। हालांकि, अब भारत के पास खिताब जीतने का मौका है और ये 2005 में जन्मे रमेशबाबू प्रगनानंद संभव करा सकते हैं।
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प्रगनानंद ने FIDE विश्व कप शतरंज टूर्नामेंट के सेमीफाइनल टाईब्रेक में अमेरिका के फाबियानो करूआना को 3.5-2.5 से हराया। करूआना दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी हैं। 18 वर्षीय प्रगनानंद ने दो मैचों की क्लासिकल सीरीज 1-1 से बराबरी पर समाप्त होने के बाद यूएसए के दिग्गज ग्रैंडमास्टर को पछाड़ दिया। प्रगनानंद वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय हैं। उनका सामना खिताब के लिए नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन से होगा।
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