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चंद्रयान-3 की सफलता के साथ भारत ने अंतरिक्ष में नया इतिहास रचा। इस अभियान के पीछे निश्चित तौर पर इसरो की टीम की कड़ी मेहनत और प्रतिज्ञा थी। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से कस्बे चरौदा के रहने वाले भरत कुमार भी इसरो की टीम चंद्रयान-3 का हिस्सा रहे। एक बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले 23 साल के भरत की कहानी देश के लाखों करोड़ो गरीब युवाओं को सीख देने वाली है। भरत के पिता एक बैंक में सिक्योरिटी गार्ड हैं और मां चाय की स्टाल चलाती है।
सोशल मीडिया पर भरत की सक्सेस स्टोरी काफी वायरल हो रही है। ट्विटर (X) पर आर्यांश नाम के यूजर ने यह प्रेरणादायी स्टोरी शेयर की है। इसके मुताबिक भरत ने चरौदा के केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई की। उनकी स्कूली पढ़ाई के दौरान परिवार बेहद गरीब था। हालत यह थी कि जब वह 9वीं कक्षा में थे, तब घरवाले उनकी मामूली स्कूल फीस भरने में भी असमर्थ थे। स्कूल ने उनके परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति देख उनकी 12वीं तक की फीस माफ कर दी। मां ने चरौदा रेलवे स्टेशन पर इडली भी बेची। भरत ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ मां की दुकान चलाने में भी मदद की।
भरत ने 12वीं की पढ़ाई के साथ इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई के लिए भी जीतोड़ मेहनत की । उन्हें आईआईटी धनबाद में एडमिशन मिला। इस समय एक बार फिर पैसों का संकट आ खड़ा हुआ। मुश्किल घड़ी में बिजनेसमैन अरुण बाघ व जिंदल ग्रुप ने उनकी मदद की।
भरत ने 98 फीसदी मार्क्स लाकर आईआईटी धनबाद में गोल्ड मेडल हासिल किया। इंजीनियरिंग के 7वें सेमेस्टर के दौरान ही उनको इसरो में प्लेसमेंट मिल गई। प्रतिभाशाली होने के चलते उन्हें इसरो की चंद्रयान-3 टीम का हिस्सा बनने का मौका मिला।
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