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हाइलाइट्स
घर के रास्ते पर बाइक पर सवार होकर लोग हाथों में तिरंगा लिए श्रद्धांजलि देने जाते नजर आए
बहन को बोला था- अभी घर नहीं आ सकता हूं. दो घंटे बाद फोन करूंगा
अक्टूबर महीने में आशीष को घर आना था और किराए के मकान से अपने नए घर में शिफ्ट होना था
पानीपत: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग (Anantnag Kashmir Encounter) में आतंकी मुठभेड़ में हरियाणा (Haryana) के पानीपत के मेजर आशीष धौंचक (Shaheed Major Ashish Dhonchak) शहीद हो गए. वह अपने परिवार के इकलौते बेटे थे. उनकी तीन बहनें हैं. आशीष महज 34 साल की उम्र में देश को अपना सर्वोच्च बलिदान दे गए. आज गांव में जब उनका पार्थिक शरीर ले जाया जा रहा था, तब क्या बच्चा और क्या बुजुर्ग, जिसने भी देखा, सबकी आंखें नम हो गईं. इस दौरान बच्चे, युवा, महिला, बुजुर्ग सभी सड़क किनारे लाइन में खड़े होकर तिरंगा लेकर उनकी शहादत को याद करते हुए मेजर आशीष अमर रहे… भारत माता की जय के जयकारे लगाते नजर आए. खासकर नन्हे स्कूली छात्रों ने हाथों में तिरंगा लिये मेजर आशीष के बलिदान को नमन करते हुए देखा गया. सबकी जुबान पर एक ही नारा था- मेजर आशीष अमर रहे.
पानीपत के बिंझौल गांव में मेजर आशीष धौंचक के पार्थिव शरीर को ले जाने के दौरान सड़क की तरफ बड़ी संख्या में लोगों की लंबी कतार उनकी शहादत को नमन करने के लिए खड़ी हुई थी. हर कोई देश के इस सपूत को नम आंखों से श्रद्धांजलि देने का आतुर नजर आया. बाइक की लंबी लाइन नजर आईं, जिस पर सवार लोग हाथों में तिरंगा लेकर शहीद मेजर आशीष धौंचक को श्रद्धांजलि देने के लिए पार्थिव शरीर के वाहन के साथ चलता दिखा. लोग उनके सम्मान में लगातार ‘भारत माता की जय’… मेजर आशीष ‘जिंदाबाद’, मेजर आशीष ‘अमर रहें‘… के जयकारे लगा रहे थे.
Anantnag Encounter: ‘पिता की तबीयत खराब है घर आ जाओ भाई’, मेजर आशीष की बहन से आखिरी बातचीत
दरअसल, मेजर आशीष के जीजा ने कहा कि कुछ दिन पहले ही आशीष की बहन से बात हुई थी. तब बहन ने पिता की बीमारी की बात की थी. बहन ने आशीष को कहा था- ‘पिता की तबीयत खराब है घर आ जाओ भाई’, जब मेजर आशीष धौंचक की बहन ने उनसे आखिरी बार बातचीत में यही कहा था. लेकिन मेजर ने कहा था कि अभी सर्च ऑपरेशन चल रहा है, अभी घर नहीं आ सकता हूं. दो घंटे बाद फोन करूंगा और फिर बात करेंगे. लेकिन अब मेजर आशीष की बहन से कभी बात नहीं होगी. अनंतनाग में आतंकी मुठभेड़ में हरियाणा के पानीपत के आशीष धौंचक शहीद हो गए.
उधर, मेजर आशीष के शहीद होने के बाद मां ने हाथ जोड़कर कहा कि वह नहीं रोएंगी, क्यों वह मेरा बेटा नहीं, देश का बेटा था. बता दें कि उनकी ढाई साल की बेटी है. शहीद मेजर आशीष के चाचा दिलावर सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले ही उनकी बातचीत हुई थी. घर के बारे में हाल-चाल जाना था. सब के बारे में बात की थी. उन्होंने बताया कि अक्टूबर महीने में आशीष को घर आना था और किराए के मकान से अपने नए मकान में शिफ्ट होना था.
(समाचार एजेंसी ANI इनपुट्स के साथ)
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Tags: Haryana news, Indian army, Jammu and kashmir, Panipat News
FIRST PUBLISHED : September 15, 2023, 11:50 IST
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