Home Life Style कौन हैं अघोर पंथ के प्रणेता? 18 प्रकार की शक्तियों का है विशेष महत्व, कौन सी हैं पहली 6

कौन हैं अघोर पंथ के प्रणेता? 18 प्रकार की शक्तियों का है विशेष महत्व, कौन सी हैं पहली 6

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कौन हैं अघोर पंथ के प्रणेता? 18 प्रकार की शक्तियों का है विशेष महत्व, कौन सी हैं पहली 6

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हाइलाइट्स

अघोर पंथ में अघोरियों के लिए सभी एक समान होते हैं.
उनके मन में किसी के लिए द्वेष और घृणा नहीं होती.

Power of Aghori : अघोर पंथ की रहस्यमयी दुनिया हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करती है. अघोर या अघोरी एक ऐसा शब्द है जिसके कानों में पड़ते ही मन मस्तिष्क में अनोखी छवि उतरकर सामने आ जाती है. संस्कृत भाषा में अघोर शब्द का अर्थ उजाले की तरफ बताया गया है. संधि विच्छेद कर समझा जाए तो अ+घोर यानी ऐसा व्यक्ति जो घोर नहीं करता, परंतु स्वभाव से सरल हो. दिखने में बेहद डरावने लेकिन हृदय से कोमल, अघोरियों को सबसे पहले अपने मन और हृदय से घृणा को निकाल कर बाहर फेंकना होता है. अघोरी अपना डेरा शमशान जैसी डरावनी जगह पर तंत्र क्रियाएं सिखाते हुए जमाते हैं. जिन चीजों से समाज को घृणा होती है, अघोरी उन्ही को अपनाते हैं. अघोरियों को 18 तरह की शक्तियां प्राप्त होती हैं, जिनमें से छह तरह की शक्तियों के बारे में बता रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

1. रक्षण शक्ति

अघोर पंथ में सबसे पहले अपने जप और पुण्य की रक्षा करने की शक्ति प्राप्त होती है. इस शक्ति को शिष्य गुरु मंत्रों के जाप से अर्जित करते हैं. रक्षण शक्ति मिलने पर वह स्वयं की और असहाय लोगों की सहायता करने में सक्षम हो जाते हैं. कहा जाता है इस शक्ति के मिलने के बाद यदि किसी साधक पर कोई परेशानी आती है, तो वह मंत्र के प्रभाव से ख़त्म हो जाती है या वह बहुत कम प्रभावित कर पाती है.

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2. गति शक्ति

दूसरे नंबर पर आती है गति शक्ति, इस शक्ति के जरिए साधक गुरु दीक्षा से पहले जिस योग और ध्यान में असफल हुए थे, उसे दीक्षा में प्राप्त हुए मंत्र के निरंतर जाप करने से साधक की साधना में गति आ जाती है. जिसके कारण उसे सभी सिद्धियां जल्द ही प्राप्त होने लगती हैं.

3. कांति शक्ति

तीसरे नंबर पर आती है कांति शक्ति. अघोरी को साधना पथ पर आगे बढ़ने के बाद यह शक्ति मिलती है. इस शक्ति से साधक का मन उज्जवल हो जाता है. उसके कुकर्म वाले संस्कार नष्ट हो जाते हैं. कांति शक्ति मिलने के बाद साधक के लिए सभी एक समान हो जाते हैं. उनके मन में किसी भी व्यक्ति के लिए घृणा और द्वेष की भावना समाप्त हो जाता है.

4. प्रीति शक्ति

इस शक्ति में साधक जैसे-जैसे मंत्रों का जाप करता है, उसकी अपने मनचाहे देवता से प्रीति लगातार बढ़ती जाती है. जब यह साधना पूरी होती है उस साधक को प्रीति सिद्धि प्राप्त हो जाती है. इस शक्ति को पाने के बाद अघोरी की सामर्थ्य शक्ति भी बढ़ जाती है.

5. तृप्ति शक्ति

पांचवी है तृप्ति शक्ति, जैसे-जैसे अघोरी मंत्रों का जाप करते हैं वैसे-वैसे उनकी अंतरात्मा में संतोष और तृप्ति बढ़ती जाती है. जब अघोरी यह शक्ति प्राप्त कर लेते हैं उनकी वाणी में सामर्थ्य आ जाता है.सरल शब्दों में समझें तो उनकी भविष्यवाणी सच होने लगती है. यहां तक कि उनका श्राप और वरदान भी फलित होने लगता है.

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6. अवगम शक्ति

18 शक्तियों में से छठवीं है अवगम शक्ति, इस शक्ति को सिद्ध करने के बाद अघोरियों को दूसरे के मन की बात पता चलने लगती है. उन्हें अगले और पिछले की पूरी जानकारी होने लगती है. यहां तक कि उन्हें यह भी पता चल जाता है कि उनसे मिलने आया व्यक्ति किस भाव से आया है.

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Religion

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