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असग़र वजाहत के कहानी-संग्रह ‘कूड़ा समय’ से चुनिंदा लघुकथाएं

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असग़र वजाहत के कहानी-संग्रह ‘कूड़ा समय’ से चुनिंदा लघुकथाएं

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जब नई कहानी की सफलता के बाद कहानी में अनेक भ्रामक आंदोलन खड़े हो गए थे, तब हिंदी कहानी के इतिहास में सत्तर का दशक बेहद उथल-पुथल वाला रहा, कहानियों की दुनिया दिशाहीन दिखाई पड़ने लगी और उन्हीं दिनों असग़र वजाहत का कहानी लेखन अपने उरूज पर था. गौरतलब है कि उन्होंने 1955-56 से ही लेखन कार्य आरंभ कर दिया था. शुरुआती दिनों में उन्होंने विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेखन कार्य किया और बाद में वे दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य करने लगे.

5 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में जन्मे विख्यात साहित्यकार असग़र वजाहत ने उपन्यास, कहानी, नाटक, यात्रा संस्मरण, निबंध, आलोचना आदि अनेक विधाओं से हिंदी साहित्य को तो संपन्न किया ही, साथ ही फिल्मों एवं धारावाहिकों के लिए पटकथा लेखन का भी कार्य किया है. उन्होंने अपने लेखन में मजदूरों, आम जनता के शोषण, शोषक के अत्याचार और समाज के यथार्थ को जगह दी है.

वजाहत साहब बहुमुखी प्रतिभा के रचनाकार हैं. उन्होंने अपने लिए जिस भी विधा को चुना, उस रचना को पहले दर्जे पर ले कर गए हैं. वे मूलत: एक कहानीकार हैं और अपनी कहानियों में तीखे व्यंग्य के साथ-साथ वर्तमान की जटिलताओं का निरुपण बहुत थोड़े शब्दों में करते हैं. उनकी कहानी यात्रा अविराम है. 2022 में असग़र वजाहत के नाटक महाबली को व्यास सम्मान से सम्मानित किया गया है. उनकी अन्य लोकप्रिय पुस्तकें हैं- बाक़र गंज के सैयद, सबसे सस्ता गोश्त, सफ़ाई गंदा काम है, जिस लाहौर नईं देख्या ओ जम्या ई नईं, गोडसे @गांधी.कॉम, भीड़तंत्र, अतीत का दरवाज़ा, स्वर्ग में पांच दिन और महाबली.

अपने कहानी-संग्रह ‘कूड़ा समय’ के बारे में असग़र वजाहत कहते हैं, “आज लोगों के दिमाग में धर्म, जाति, देश एकाधिकार, घ़णा और नफ़रत का ऐसा कूड़ा भरा जा रहा है, जिसके कारण चारों तरफ बढ़ती हिंसा देखने को मिलती है. कूड़े को हटाने की कोशिश कूड़ा पहचानने से शरू होती है. ‘कूड़ा समय’ इस दिशा में एक बहुत छोटी-सी कोशिश है.” प्रस्तुत हैं ‘कूड़ा समय’ कहानी-संग्रह से असग़र वजाहत की पांच चुनिंदा लघुकथाएं-

1)
कहानी : सब की ज़मीन

दोनों देशों के बीच एक ज़मीन है, जिसे नो मैंस लैंड कहते हैं. इस ज़मीन पर कोई नहीं रहता. न तो इस देश के लोग रहते हैं और न उस देश के लोग रहते हैं.

इस देश में रहने वालों की तकलीफें जब हद से बढ़ गईं तब उन्होंने सोचा कि चलो नो मैंस लैंड में रहा जाए.

धीरे-धीरे इस देश के लोग नो मैंस लैंड में रहने के लिए आने लगे.

उस देश के लोगों ने भी अपने देश में रहने की तुलना में नो मैंस लैंड में रहने को प्राथमिकता दी है.

दोनों देशों के लोग नो मैंस लैंड में रहने के लिए आन लगे. धीरे-धीरे हुआ यह कि दोनों देशों की पूरी आबादी नो मैंस लैंड में आ गई.

और दोनों देशों में केवल देशों की सरकारें रह गईं.

2)
कहानी : जन्नत का मंज़र

“मुझे जन्नत में सबसे बड़ा बंगला और सबसे सुंदर हूर मिलनी चाहिए…”
– “क्यों?”
-“मैं 72 काफ़िरों को मार कर आया हूं”
-“काफ़िर कौन थे…?”
-“मतलब…?”
-“मतलब, काफ़िर ईंट-गारे के थे या घास-फूस के या रोबोट…?”
-“जी काफ़िर भी मेरी तरह हाड़-मांस के इंसान थे.”
-“उन्हें किसने बनाया था?”
-“जी सारी कायनात अल्लाह ने बनाई है… उन्हें भी अल्लाह ने बनाया…”
-“जिसको अल्लाह ने बनाया उसे मारने का हक़ तुम्हें किसने दिया…?”
-“ज… ज.. जी…!”
-“अल्लाह के बंदों को मारने के बाद तुम्हें क्या मिलना चाहिए?”
-“जी मौलवी साब ने तो बताया था काफिरों को मारने से जन्नत मिलती है…”
-“तो जाओ मौलवी साब से ही ले लो…”

3)
कहानी : लिंचिंग

बूढ़ी औरत को जब बताया गया कि उसके पोते सलीम की ‘लिंचिंग’ हो गई है, तो उसकी समझ में कुछ न आया. उसके काले झुर्रियों भरे चेहरे और धुंधली-मटमौली आंखों में कोई भाव न आया. उसने फटी चादर से अपना सिर ढंक लिया. उसके लिए ‘लिंचिंग’ शब्द नया था. पर उसे यह अंदाज़ा हो गया था कि यह अंग्रेज़ी का शब्द है. इससे पहले भी उसने अंग्रेज़ी का पहला शब्द ‘पास’ सुना था जब सलीम पहली क्लास में ‘पास’ हुआ था. वह जानती थी कि ‘पास’ का क्या मतलब होता है. दूसरा शब्द उसने ‘जॉब’ सुना था. वह समझ गई थी कि ‘जॉब’ का मतलब नौकरी लग जाना है. तीसरा शब्द उसने ‘सौलरी’ सुना था. वह जानती थी कि ‘सौलरी’ का क्या मतलब होता है. यह शब्द सुनते ही उसकी नाक में तवे पर सिंकती रोटी की सुगंध आ जाया करती थी. उसे अंदाज़ा था कि अंग्रेज़ी के शब्द अच्छे होते हैं और उसके पोते के बारे में यह कोई अच्छी खबर है.

बुढ़िया इत्मीनान भरे स्वर में बोली, “अल्लाह उनका भला करे…”

लड़के हैरत से उसे देखने लगे. सोचने लगे कि बुढ़िया को ‘लिंचिंग’ का मतलब बताया जाए या नहीं. उसके अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी, कि बुढ़िया को बताएं कि ‘लिंचिंग’ क्या होती है.

बुढ़िया ने सोचा इतनी अच्छी खबर देने वाले लड़कों को दुआ तो ज़रूर देनी चाहिए. वह बोली, “बच्चों, अल्लाह करे तुम सबकी लिंचिंग हो जाए… ठहर जाओ मैं मुंह मीठा कराती हूं.”

4)
कहानी : नेता का त्याग

मरते हुए बच्चे की मां ने कहा, “डॉक्टर, दवा और अस्पताल चाहिए.”

बेरोज़गार युवक ने कहा, “नौकरी चाहिए”

मज़दूर बोला, “मज़दूरी चाहिए.”

खुले आसमान के नीचे जाड़े से ठिठुरते हुए आदमी ने कहा, “छत चाहिए.”

बाढ़ के पानी में डूबते आदमी ने कहा, “मुझे बचा लो.”

नेता ने कहा, “तुम लोग कितने स्वार्थी हो… सबको अपनी-अपनी लगी है… देश की चिंता किसी को नहीं है… मुझे देखो… मुझे कुछ नहीं चाहिए… सिर्फ देश सेवा करना चाहता हूं… मउझे मंत्री बना दो…”

5)
कहानी : भय का दर्शन

“गुरुजी मेरी लोकप्रियता कम हो रही है.”
-“कैसे राजन?”
-“लोग मेरी बात नहीं सुनते.”
-“तुम कैसे बात करते हो?”
-“जैसे आपसे बात कर रहा हूं.”
-“नहीं-नहीं इस तरह कोई तुम्हारी बात नहीं सुनेगा.”
-“फिर क्या करूं गुरूजी?”
-“कान खोलकर सुन लो. तुम्हारी बात लोग उस समय तक नहीं सुनेंगे2, जब तक तुम उनको डराओगे नहीं.”

Tags: Hindi Literature, Hindi Writer, Literature

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