Home National उम्मीद की नजर से देख रही दुनिया, शांति का रास्ता दिखाए भारत; इजराइल-हमास युद्ध का जिक्र कर भागवत ने दी सलाह

उम्मीद की नजर से देख रही दुनिया, शांति का रास्ता दिखाए भारत; इजराइल-हमास युद्ध का जिक्र कर भागवत ने दी सलाह

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उम्मीद की नजर से देख रही दुनिया, शांति का रास्ता दिखाए भारत; इजराइल-हमास युद्ध का जिक्र कर भागवत ने दी सलाह

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यूक्रेन और इजरायल में युद्ध का जिक्र करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि दुनिया शांति और समृद्धि का नया रास्ता दिखाने के लिए भारत की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया “धार्मिक कट्टरता” से उपजी कट्टरता, अहंकार और उन्माद के संकट का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के पास इन समस्याओं का मुकाबला करने के लिए “पर्याप्त दृष्टि” नहीं है। नागपुर में आरएसएस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन की तारीख का भी खुलासा किया।

भागवत ने कहा, “दुनिया धार्मिक संप्रदायवाद से उत्पन्न कट्टरता, अहंकार और उन्माद के संकट का सामना कर रही है। यूक्रेन या गाजा पट्टी में युद्ध हितों के टकराव और उग्रवाद के कारण उत्पन्न हुआ है लेकिन इन संघर्षों का कोई भी समाधान दिखाई नहीं देता है।” उन्होंने कहा कि दुनिया उदाहरण पेश करने के लिए भारत की ओर “उम्मीद से” देख रही है।

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RSS प्रमुख ने कहा, “आतंकवाद, शोषण और अधिनायकवाद को कहर बरपाने की खुली छूट मिल रही है। यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि दुनिया अपनी अपर्याप्त दृष्टि से इन समस्याओं का मुकाबला नहीं कर सकती। इसलिए, दुनिया भारत की ओर उम्मीद से देख रही है कि वह उदाहरण पेश करेगा और अपने सनातन मूल्यों और संस्कारों के आधार पर शांति और समृद्धि का एक नया रास्ता दिखाएगा।” 

भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन की तारीख का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा, “अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन रहा है…22 जनवरी को मंदिर में भगवान राम (मूर्ति) की स्थापना की जाएगी…उस दिन हम पूरे देश में अपने-अपने मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं।” 

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में ‘तथाकथित सांस्कृतिक मार्क्सवादी देश की शिक्षा और संस्कृति को बर्बाद’ करने का आरोप लगाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ‘तथाकथित सांस्कृतिक मार्क्सवादी और जागरुक तत्व’ देश की शिक्षा एवं संस्कृति को बरबाद करने के लिए मीडिया तथा शिक्षा जगत में अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर रहे हैं। नागपुर में आरएसएस की दशहरा रैली को संबोधित करते हुए भागवत ने ‘तथाकथित सांस्कृतिक मार्क्सवादियों और जागरुक तत्वों’ को देश की शिक्षा एवं संस्कृति को बरबाद करने के लिए मीडिया तथा शिक्षा जगत में अपने प्रभाव का दुरुपयोग करने वाली स्वार्थी, भेदभावपूर्ण व धोखेबाज ताकतों के रूप में परिभाषित किया।

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