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इस साल उत्तर प्रदेश में शराब और बीयर की बिक्री में काफी इजाफा हुआ है। इस वजह से इन दोनों से आबकारी विभाग को गत वर्ष की तुलना में काफी अधिक राजस्व की प्राप्ति हुई है। हालिया समीक्षा में पता चला है कि जनवरी से लेकर दिसंबर तक विभाग को शराब और बीयर से 45 हजार करोड़ का राजस्व मिला है जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में लगभग 36 हजार करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ था।
देशी, अंग्रेजी शराब और बीयर से विभाग को 55 से लेकर 65 फीसदी तक राजस्व मिलता है। मसलन 100 रुपये कीमत वाली शराब और बीयर पर विभाग को 55 से 65 रुपये तक बतौर राजस्व मिलते हैं। इस हिसाब से 45 हजार करोड़ के राजस्व पर प्रदेश में इस साल बेची गई शराब और बीयर की कुल कीमत लगभग 70 हजार करोड़ रुपये आंकी जा रही है। शराब की बिक्री के मामले में लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा और कानपुर सबसे आगे हैं।
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लखनऊ में हर साल 2600 से 2800 करोड़, गाजियाबाद में 2500 से 2700 करोड़ तो नोएडा में लगभग 2600 और कानपुर में लगभग 2500 करोड़ रुपये की शराब बेची जा रही है। आगरा में 2200 करोड़, वाराणसी में 2000 करोड़, गोरखपुर में 1800 करोड़ और प्रयागराज में 1600 करोड़ रुपये की शराब बेची जाती है। छोटे जिलों में भी हर साल एक हजार करोड़ से अधिक की शराब बेची जा रही है। जिलों में बिक्री का आंकड़ा हर साल बदल जाता है क्योंकि आबकारी नीति में बिक्री का लक्ष्य बढ़ा दिया जाता है।
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