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नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्षद्वीप चर्चा में है. पीएम के लक्षद्वीप दौरे से मालदीव को जबरदस्त मिर्ची लगी है. लेकिन क्या ये केवल इत्तेफ़ाक है या पीएम की सोची समझी रणनीति. पीएम ने एक दौरे यानी एक तीर से कई निशान किए हैं. इस बात को समझना होगा की पीएम लक्षद्वीप छुटियां मनाने नहीं गए थे. जैसा कि पहले कई बड़े नेताओं ने किया है. पीएम के इस दौरे का मकसद ही अलग था. पीएम ने जैसे ही लक्षद्वीप के दौरे का फोटो सार्वजनिक किया, विपक्ष को तंज कसने का मौका मिल गया. लेकिन मालदीव को तो मिर्ची ही लग गयी. मालदीव के मंत्रियों की टिप्पणी स्वभाविक थी की पीएम ने उनका खासा नुकसान कर दिया था. हालांकि पीएम पर मालदीव की टिप्पणी का खामियाजा तो उन्हें भुगतना पड़ रहा है. लेकिन पीएम के इस दौरे के पीछे की मंशा को समझना होगा.
पीएम मोदी के इस दौरे का असर
जब से प्रधानमंत्री मोदी ने लक्षद्वीप का दौरा किया है, तब से लक्षद्वीप को लेकर एक प्राइवेट सर्च प्लेटफॉर्म पर सर्च 3400% बढ़ गया है. यहां तक की लोग अब मालदीव का टिकट कैंसिल करवाकर लक्षद्वीप का रूख कर रहे है. पीएम के दौरे के बाद से लगातार गूगल सर्च इंजन पर सबसे ज्यादा खोजे जाना वाला कीवर्ड लक्षद्वीप बना हुआ है.
सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाला वर्ड बना लक्षद्वीप
4 जनवरी को ‘लक्षद्वीप’ भारत में गूगल पर 10वां सबसे अधिक खोजा जाने वाला कीवर्ड था. लेकिन, 8 जनवरी को लक्षद्वीप के लिए दुनियाभर में लोग इस जगह को सर्च कर रहे हैं जो कि 20 साल में सबसे अधिक है. खासतौर पर यह खोज तब ज्यादा बढ़ी जब प्रधानमंत्री ने लक्षद्वीप की यात्रा के दौरान स्नॉर्कलिंग से लेकर सफेद रेत पर चलने और समुद्र तट आराम करने की कई तस्वीरें शेयर कीं. इन तस्वीरों में लक्षद्वीप की खूबसूरती देखते ही बन रही थी।
पीएम मोदी का लक्षद्वीप दौरा चर्चा में
पीएम मोदी के इस दौरे के बाद साल 1987 में राजीव गांधी का लक्षद्वीप दौरा चर्चा में है. राजीव गांधी तब अपने परिवार और अपने ससुराल से आए मेहमानों और दोस्तों के साथ वहां छुट्टियां मनाने आए थे. 1987 में गांधी परिवार अपने कुछ भारतीय और विदेशी दोस्तों को कोचीन से 465 किमी पश्चिम में लक्षद्वीप द्वीपसमूह के बंगाराम के द्वीप पर ले गया था. उस समय इस दौरे की जो वीवीआईपी व्यवस्थाएं हुईं इस पर काफी विवाद हुआ था.
आईएनएस विराट को लेकर शुरू हुआ था विवाद
विवाद का एक मुद्दा आईएनएस विराट का इस्तेमाल करना भी था. पीएम की सुरक्षा के लिए आईएनएस विराट को 10 दिन के लिए अरब सागर में ले जाया गया था. समुद्र में आईएनएस विराट का दैनिक खर्च बहुत ज्यादा होता है क्योंकि विराट एस्कॉर्ट जहाजों के पूरे दल के साथ यात्रा करता है. आईएनएस विराट भारतीय नौसेना का प्रमुख विमानवाहक पोत है, इसे 1987 में कमीशन किया गया था और लगभग 30 वर्षों तक इसने सेवा प्रदान की है.
राजीव गांधी की लक्षद्वीप यात्रा भी सर्खियों में रही
कहा जाता है कि राजीव गांधी का ये दौरा उस वक्त सुर्खियों में आया और कहा गया कि बोफोर्स से लोगो का ध्यान हटाने के लिए एक बड़ा स्टंट था. एक तरफ जहां राजीव गांधी का वो दौरा केवल विवादों के लिए जाना जाता है कि किस तरीके देश के संसाधनों का इस्तेमाल अपने परिवार के छुट्टियों के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया था और पीएम मोदी का लक्षद्वीप का ये दौरा, जो भारतीयों के लिए अवसर प्रदान करता हैं. अंतर साफ है.
सिलसिलेवार समझते है आखिर क्यों चुना पीएम ने लक्षद्वीप को
पीएम मोदी का लक्षद्वीप दौरा हर मामले में बेहद ख़ास है. पीएम ने अपने दौरे के जरिए जहां एक तरफ टूरिज्म की संभावनाओं को विकसित करने का प्रयास किया है. भारतीय पर्यटकों की नजर में लक्षद्वीप को मालदीव के मुकाबले बेहतर साबित किया है. वहीं दूसरी तरफ भारत विरोधी रुख अख्तियार कर रहे मालदीव को भी यहां से कड़ा संदेश दिया है. पीएम मोदी की लक्षद्वीप यात्रा का जियो-पॉलिटिकल महत्व भी काफी है. पहली बात तो यात्रियों के बीच में मालदीव की प्रसिद्धि काफी ज्यादा है. अब लक्षद्वीप को एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर डेवलप करके इसे मालदीव से ज्यादा प्रसिद्धि दिलाने का मकसद है.
मालदीव के राष्ट्रपति के भारत विरोधी बयान का मुंहतोड़ जवाब
इसके साथ ही साथ, भारत विरोधी सुर में बोल रहे मालदीव के नए राष्ट्रपति को भी यहां कड़ा संदेश देने का काम पीएम मोदी ने किया है. आपको बता दे कि मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भारत से अपने सैनिकों को हटाने के लिए कह चुके हैं. मुइज्जू ने कहा कि वह इस बात को लेकर दृढ़प्रतिज्ञ हैं कि उनका देश विदेशी सैनिकों की मौजूदगी के बिना पूरी तरह से आजाद रहे. माना जा रहा है कि वह चीन के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं. ऐसे में पीएम मोदी का लक्षद्वीप जाना, मालदीव के लिए एक बड़ा संदेश हो सकता है.
लोकल फॉर वोकल का विस्तार
अगर आपको याद हो बीते साल नवंबर में मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी ने एक खास संदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि अमीर भारतीय विदेशों में शादी रचाने की जगह भारत को प्राथमिकता दें. पीएम मोदी ने कहा था कि गरीब लोग भी अपने बच्चों को आपकी शादी के बारे में बताएंगे. क्या आप ‘वोकल फॉर लोकल’ के इस मिशन का विस्तार कर सकते हैं? हम अपने देश में इस तरह के विवाह समारोह क्यों नहीं आयोजित करते? बाद में उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट के दौरान भी उन्होंने इस बात को दोहराया था.

उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया की तर्ज पर वेड इन इंडिया की मुहिम भी शुरू होनी चाहिए. पीएम मोदी की लक्षद्वीप यात्रा इसी वोकल फॉर लोकल मिशन को बढ़ाने के तहत है. लक्षद्वीप से पीएम मोदी ने संदेश दिया कि यह सिर्फ एक द्वीप नहीं है, बल्कि परंपरा और खूबसूरती के मामले में भी यह काफी विशिष्ट है. वह इसे भी एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित करने की तरफ देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग भी एडवेंचर की तलाश में हैं, उनकी लिस्ट में लक्षद्वीप भी जरूर होना चाहिए.
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Tags: Lakshadweep, Narendra modi, PM Modi
FIRST PUBLISHED : January 9, 2024, 09:58 IST
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