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हाइलाइट्स
आधे से अधिक किशोर अपनी शारीरिक बनावट के लिए ऑनलाइन ट्रोलिंग और बुली के शिकार हुए.
अधिकतर किशोरों, युवाओं को मेडिकल हेल्प की जरूरत थी, जबकि 10 में से केवल 1 को ही उपचार हासिल हुआ.
Social Media Triggers Children To Dislike Their Own Bodies: अब तक हम यह जानते आए हैं कि सोशल मीडिया मानसिक सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचा रहा है. खासतौर पर किशोरों और युवाओं को, लेकिन एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. नए शोध में यह पता चला है कि सोशल मीडिया बच्चों और युवाओं की सेहत को भी तेजी से प्रभावित कर रहा है. एक नए अध्ययन में पाया गया है कि सर्वे में हिस्सा लेने वाले 12 वर्ष की आयु के 4 में से 3 बच्चे अपने शरीर को नापसंद करते हैं और इसकी वजह से उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है. जबकि 18 से 21 वर्ष की आयु के 10 युवाओं में से 8 को ऐसा महसूस होता है. यह जानकारी एक नए अध्ययन से मिली है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि सोशल मीडिया आज के बच्चों और युवा पीढ़ी के वर्तमान और भविष्य के स्वास्थ्य के लिए जोखिम बन सकता है.
शोध में क्या पाया गया
शोध में हिस्सा लेने वाले 12 से 21 वर्ष की आयु के सभी किशोरों और युवाओं में से लगभग आधे ने यह स्वीकारा कि उनके शारीरिक बनावट को लेकर ऑनलाइन ट्रोलिंग और बुली की गई, जिसकी वजह से वे या तो जरूरत से अधिक व्यायाम करने लगे या पूरी तरह से सोशल होना बंद कर दिया या खुद को किसी ना किसी तरह से नुकसान पहुंचाया.
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यही नहीं, 10 में से 4 ने यह भी स्वीकारा कि वे लंबे समय तक मानसिक रूप से डिस्ट्रेस रहे हैं. यह भी पाया गया कि इनमें 5 में से 1 बॉडी इमेज मुद्दे की वजह से परेशान थे. इसके अलावा, 14% युवाओं ने अत्यधिक प्रतिबंधित भोजन का सेवन किया, जो उनकी वर्तमान और भविष्य की सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. इनमें से अधिकतर किशोरों और युवाओं को मेडिकल हेल्प की जरूरत थी, जबकि 10 में से केवल 1 युवा उपचार हासिल कर पाए हैं.
क्या कहना है विशेषज्ञों का
द गार्जियन के मुताबिक, बता दें कि यह सर्वे युवा मेंटल हेल्थ चैरिटी स्टेम 4 ने किया था, जिसमें 1,024 किशोरों और युवाओं को शामिल किया गया. सर्वे में हिस्सा लेने वालों की आयु 12 से 21 वर्ष की थी. स्टेम 4 की संस्थापक, सीईओ और कंसल्टेंट क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. निहारा क्राउसे का सर्वे के नतीजों और सोशल मीडिया का किशोरों और युवाओं की सेहत पर पड़ रहे असर के बारे मे गौर करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में अरजेंट एक्शन की तत्काल जरूरत है. डॉ. निहारा क्राउसे के अनुसार, हमें सोशल मीडिया कंटेंट के संभावित आकर्षण, एल्गोरिदम के माध्यम से बनाए गए रीइनफोर्समेंट, ऐप्स के साथ युवाओं का इंगेजमेंट और उनके मानसिक स्वास्थ्य की समझ पर पड़ने वाले प्रभाव और उसमें सुधार करने की तुरंत आवश्यकता है.
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Tags: Health, Lifestyle, Mental health
FIRST PUBLISHED : January 02, 2023, 17:30 IST
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