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पाकिस्तान ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की। पाकिस्तान ने ईरान सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ‘आतंकी ठिकानों’ पर ड्रोन और मिसाइल से सैन्य हमले किए, जिसमें नौ लोग मारे गए। ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने इन हमलों से पहले अमेरिका के साथ सलाह मशविरा किया था। इस संबंध में जब अमेरिका से सवाल पूछे गए तो उसने चुप्पी साध ली।
गुरुवार को अमेरिका की बाइडेन सरकार से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान ने ईरान पर जवाबी हवाई हमले करने से पहले वाशिंगटन के साथ बात की थी? इस पर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, “मेरे पास निजी बातचीत के बारे में बताने के लिए कुछ भी नहीं है।” मिलर ने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
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बता दें कि इससे पहले ईरान ने बलूचिस्तान में मिसाइल हमले किए थे। इसके मद्देनजर पाकिस्तान ने ईरान से अपना राजदूत वापस बुला लिया था और सभी पूर्व निर्धारित उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय यात्राओं को सस्पेंड कर दिया था। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा, ‘‘आज सुबह पाकिस्तान ने ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए सैन्य हमले किए।’’ इसने कहा कि खुफिया सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में कई आतंकवादी मारे गए। इस अभियान का कोडनेम ‘‘मार्ग बार सरमाचर’’ था। फारसी भाषा में ‘‘मार्ग बार’’ का मतलब है ‘‘मृत्यु’’ जबकि बलूच भाषा में ‘‘सरमाचर’’ का मतलब गुरिल्ला है।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान एक दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं। फिलहाल अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि मामले को ज्यादा बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि अमेरिकी सरकार ईरान और पाकिस्तान के बीच मौजूदा स्थिति को कैसे देखती है, तो मिलर ने कहा, “हम क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित हैं। हमने इस बारे में कई बार बात की और इस पर हमारा पूरा ध्यान है। हम 7 अक्टूबर से तनाव बढ़ने की आशंका को लेकर बेहद चिंतित हैं।” अमेरिका का इशारा 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमास के हमले की तरफ था।
फिलिस्तीन के गाजा शहर पर नियंत्रण रखने वाले आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर भीषण हमला किया था। इस हमले में 1200 के करीब इजरायली मारे गए थे। हमास के बारे में कहा जाता है कि इसे ईरान का समर्थन हासिल है और 7 अक्टूबर के हमले के पीछे भी ईरान का हाथ था। हालांकि इजरायल और अमेरिका के पुराने दुश्मन ईरान ने हमले में सीधे शामिल होने के आरोपों का खंडन किया है।
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