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मंगलवार को भारत सरकार ने बड़ा ऐलान करते हुए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा की। यह सम्मान उनके जन्मशताब्दी दिवस पर दिया जाएगा। यह बड़ा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बिहार में सभी राजनीतिक दल कर्पूरी ठाकुर की विरासत के लिए लड़ रहे हैं। बिहार की नीतीश कुमार सरकार कर्पूरी ठाकुर के गांव में तीन दिवसीय कार्यक्रम करने जा रही है। नीतीश कुमार का भाषण भी होगा। कर्पूरी जयंती अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के वोटरों को लुभाने के लिए बिहार में हमेशा एक बड़ा राजनीतिक आयोजन रहा है, जो राज्य में सबसे बड़ी आबादी का हिस्सा है।
बिहार के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री ठाकुर को उस व्यक्ति के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने बिहार में अति पिछड़े वर्ग की राजनीति की पटकथा लिखी और कठोर परिस्थितियों का सामना करते हुए न केवल उनकी मांगों को उठाया, बल्कि उन्हें साकार भी किया। उनके प्रयासों ने मंडल आयोग के लिए रास्ता तैयार किया और राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना की मांग को ऊपर उठाया।
70 के दशक का वो दौर
कर्पूर ठाकुर, जो नाई समुदाय से आते थे, अति पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते थे। यह वह दौर था जब 1970 के दशक में EBC राज्य की आबादी का 1.6% से भी कम था। उन्होंने पिछड़ी जातियों को एकजुट किया और उनके अथक प्रयासों की बदौलत वर्ग को सरकारी सेवाओं में 26% आरक्षण का मार्ग प्रशस्त हुआ। सरकारी सेवा का अधिकार 10 नवंबर, 1978 को मिला था।
लालू और नीतीश के राजनीतिक गुरु
ठाकुर एक समाजवादी नेता थे। उन्होंने वह करने का साहस किया जो उनसे पहले किसी ने नहीं किया। वह सबसे पहले पिछड़े वर्गों में से सबसे वंचितों को अलग कर उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए लड़ने वाले पहले व्यक्ति थे। उनकी इसी विरासत का पालन करने का दावा लालू प्रसाद और नीतीश कुमार कर चुके हैं। अब भाजपा भी इसे अपनाने से नहीं कतराती।
भारत रत्न सम्मान
कर्पूरी ठाकुर अपने राजनीतिक कार्यों और सादगी के कारण एक प्रतिष्ठित व्यक्ति माने जाते थे। उन्हें भारत रत्न दिए जाने पर एक बार फिर श्रेय लेने के लिए बिहार में राजनीतिक मंथन शुरू हो सकता है। लालू प्रसाद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों ने कर्पूरी विरासत को भुनाया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि 1990 के दशक के बाद से पिछड़े वर्गों के हाथों से बागडोर फिसल न जाए।
भाजपा क्या सोचती है
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने के ऐलान को ऐतिहासिक क्षण बताया और इसे हकीकत बनाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से हर बिहारवासी को गर्व है। राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील मोदी ने कहा कि नरेंद्र मोदी, जो खुद ईबीसी से आते हैं, ने एक सच्चे समाजवादी नेता का सम्मान करके वह काम किया जो कोई और नहीं कर सका। कर्पूरी जी इसके हकदार थे क्योंकि उन्होंने गरीबों के लिए काम किया। नरेंद्र मोदी आज वही कर रहे हैं और इसके लिए वह प्रशंसा के पात्र हैं।’
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