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एआईसीटीई सिर्फ स्टैंडर्ड सेटिंग बॉडी है। हम डिग्री नहीं देते हैं। शिक्षकों को प्रशिक्षण, छात्रों को इंटर्नशिप और अंतरराष्ट्रीय स्तर का करिकुलम बनाकर देंगे। यह सुविधा हम बीसीए और बीबीए या बीएमएस पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कॉलेजों को देंगे। पर, उन्हें मान्यता यूजीसी ही प्रदान करेगा। यह बातें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के प्रो. टीजी सीताराम ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कही। वह पिछले दिनों लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय संस्थागत नेतृत्व समागम में हिस्सा लेने आए थे।
प्रो. टीजी ने कहा कि 26 शहरों में 100 सुविधा केंद्र स्थापित किए गए हैं। यहां बीसीए और बीबीए या बीएमएस पाठ्यक्रमों की पेशकश करने वाले संस्थानों जाकर एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं। जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रो. टीजी सीताराम ने बताया कि बीसीए और बीबीए या बीएमएस संचालित करने वाले संस्थानों को एआईसीटीई अनुमोदन के नए प्रावधान आदर्श पाठ्यक्रम के जरिए बेहतर गुणवत्ता, प्रगति, सक्षम और स्वनाथ करेगा। छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए पात्रता, अटल अकादमी, अनुसंधान संवर्धन के माध्यम से एफडीपी में संकाय भागीदारी भी सुनिश्चित करेगा। प्रो. टीजी सीताराम ने कहा कि संकाय के वित्त पोषण की योजना, छात्रों के लिए इनोवेशन सेल गतिविधियां, सभी तकनीकी पुस्तकों और छात्र मूल्यांकन पोर्टल तक पहुंच, एआईसीटीई के इंटर्नशिप के माध्यम से छात्रों के लिए प्लेसमेंट सुविधाएं भी मुहैया कराएंगे। वहीं, हमारे पास पूरे देश से डाटा आए हैं। बीते तीन वर्षों से इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, होटल मैनेजमेंट और आर्ट्स एंड डिजाइन में एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है।
मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल की अपेक्षा कंप्यूटर एंड डाटा साइंस में बच्चे ज्यादा हैं। क्योंकि इसमें रोजगार की संभावना अधिक है।
इसलिए इसमें सीटें भी ज्यादा हैं।
प्रो. टीजी सीताराम।
कोर इंजीनियरिंग में ज्यादा संभावनाएं
एआईसीटीई चेयरमैन ने कहा कि हमें इस अवधारणा को बदलना है कि कोर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके नौकरी नहीं मिल सकती। रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठना है। उन्होंने कहा कि आईटी की अपेक्षा कोर इंजीनियरिंग में अच्छी संभावनाएं हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि आईटी क्षेत्र में नौकरी करने वाला व्यक्ति 10 हजार रूपये प्रतिमाह कमाई कर रहा है।
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