Home National 77 वर्ष का हुआ राजकमल प्रकाशन, 30 साल के युवा बनेंगे ‘भविष्य के स्वर’

77 वर्ष का हुआ राजकमल प्रकाशन, 30 साल के युवा बनेंगे ‘भविष्य के स्वर’

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77 वर्ष का हुआ राजकमल प्रकाशन, 30 साल के युवा बनेंगे ‘भविष्य के स्वर’

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हाइलाइट्स

राजकमल प्रकाशन अपनी स्थापना का 77वां सहयात्रा उत्सव मना रहा है.
सहयात्रा उत्सव में होगा चौथे विचार पर्व ‘भविष्य के स्वर’ का आयोजन.
‘भविष्य के स्वर’ विशेष चयन प्रक्रिया से चुनीं हिंदी की चार विशिष्ट प्रतिभाएं.

राजकमल प्रकाशन अपने 77वें स्थापना दिवस मना रहा है. इस अवसर पर 28 फरवरी, बुधवार को ‘भविष्य के स्वर’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. कार्यक्रम में साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय चार युवा प्रतिभाएं व्याख्यान देंगी. राजकमल प्रकाशन अपना मंच प्रदान कर व्यापक जनसमुदाय के बीच इन युवाओं की प्रतिभा और संभावनाओं को रेखांकित करेगा.

राजकमल प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अशोक माहेश्वरी ने बताया कि राजकमल प्रकाशन बुधवार को 77वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह हिंदी पाठक, लेखक समाज की, हम सबकी सहयात्रा का गौरवशाली क्षण है. इस विशेष अवसर पर प्रकाशन समूह चौथे विचार पर्व का आयोजन कर रहे हैं. विचार पर्व में ‘भविष्य के स्वर’ शृंखला की चौथी कड़ी प्रस्तुत की जाएगी. इसमें चार युवा इतिहास अध्येता ईशान शर्मा, कहानीकार कैफी हाशमी, कवि विहाग वैभव और आदिवासी लोक साहित्य अध्येता-कवि पार्वती तिर्की अपना व्याख्या प्रस्तुत करेंगी.

उन्होंने कहा कि राजकमल प्रकाशन का मानना है कि विचार और पुनर्विचार की निरन्तरता से ही कोई समाज आगे बढ़ता है. भविष्य पर विचार किए बिना और दिशा के बिना कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता. इसके लिए सकारात्मक बदलाव के सूत्रों को संगठित करना जरूरी है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर राजकमल प्रकाशन ने अपनी स्थापना के 70वें वर्ष से ‘भविष्य के स्वर’ का सिलसिला शुरू किया था.

राजकमल प्रकाशन की स्थापना 28 फरवरी, 1947 को हुई थी. राजकमल का स्थापना दिवस, प्रकाशन दिवस के रूप में मनाया जाता है. राजकमल प्रकाशन दिवस पर वर्ष 2019 से ‘भविष्य के स्वर’ व्याख्यान शृंखला की शुरूआत की गई.

21 युवा प्रतिभाओं का हो चुका है व्याख्यान
राजकमल प्रकाशन स्थापना दिवस पर आयोजित हो रहे ‘भविष्य के स्वर’ विचार पर्व में अब तक 21 युवा प्रतिभाएं अपने व्याख्यान दे चुकी हैं. ‘भविष्य के स्वर’ के वक्ताओं के तौर पर पहले राजकमल 40 वर्ष तक की प्रतिभाओं को मौका देता था. अब इसकी अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष कर दी गई है.

‘भविष्य के स्वर’ विचार पर्व के घुमन्तू पत्रकार-कथाकार अनिल यादव, कवि-शोधकर्ता अनुज लुगुन, कवि-कथाकार गौरव सोलंकी, कलाकार डिजाइनर अनिल आहूजा, मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार, आरजे सायमा, पत्रकार अंकिता आनंद, कवि सुधांशु फिरदौस, कवयित्री जंसिता केरकेट्टा, किस्सागो हिमांशु वाजपेयी, सिने आलोचक मिहिर पांड्या, कथाकार चन्दन पांडेय, कवि-आलोचक मृत्युंजय, यायावर लेखक अनुराधा बेनीवाल, अनुवादक लेखक अभिषेक श्रीवास्तव, लोकनाट्य अध्येता अमितेश कुमार, आलोचक चारु सिंह, लोक साहित्य अध्येता जोराम यालाम नाबाम, गीतकार-लेखक नीलोत्पल मृणाल और फैशन डिजाइनर मालविका राज ने अपना वक्तव्य दिया था.

ईशान शर्मा
ईशान शर्मा TEDX वक्ता, लेखक और राष्ट्रीय धरोहर व स्मारकों के क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ता हैं. वे भारत में इतिहास और धरोहर से जुड़े मुद्दों पर एक प्रखर युवा आवाज बनकर उभरे हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक ईशान एमएसयू बड़ौदा से आधुनिक भारतीय इतिहास में एमए कर रहे हैं. इतिहास के अलावा सिनेमा में खास दिलचस्पी रखते हैं. भारत के अग्रणी इतिहास कलेक्टिव्स में से एक ‘कारवाँ : द हेरिटेज एक्सप्लोरेशन इनिशिएटिव’ के संस्थापक भी हैं.

कैफी हाशमी
कैफी हाशमी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से उच्च शिक्षा प्राप्त की है. पेशे से शिक्षक हैं. उनकी कहानियों ने पिछले कुछ समय में अपनी खास पहचान बनाई है. ‘कैफे कॉफी डे’, ‘दुनिया का पहला और आखरी सवाल’, ‘मोबियस स्ट्रिप’ आदि उनकी चर्चित कहानियां हैं. ‘वनमाली कथा’ में प्रकाशित उनकी कहानी ‘शिया बटर’ विशेष रूप से चर्चित रही है.

विहाग वैभव
विहाग वैभव ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है. विभिन्न पत्रिकाओं में उनके शोध पत्र प्रकाशित हैं. हिंदी की लगभग सभी चर्चित पत्रिकाओं में उनकी कविताएं प्रकाशित हैं. अंग्रेजी समेत कई भारतीय भाषाओं में उनकी कविताएं अनूदित भी हुई हैं. ‘मोर्चे पर विदागीत’ उनका प्रकाशित कविता संग्रह है. वे ‘भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार’ से सम्मानित हैं.

पार्वती तिर्की
पार्वती तिर्की ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से ‘कुडुख आदिवासी गीत : जीवन राग और जीवन संघर्ष’ विषय पर शोधकार्य किया है.’फिर उगना’ नाम से उनका एक कविता-संग्रह प्रकाशित है. कविता के अलावा गीत और कहानी में भी वे खास दिलचस्पी रखती हैं. फिलहाल रांची विश्वविद्यालय के राम लखन सिंह यादव महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं.

Tags: Hindi Literature, Hindi Writer, Literature

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