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Keep Medicine In Correct Direction: भारतीय वास्तु शास्त्र में हर दिशा का अपना एक खास महत्व है. कोई दिशा धन-संपत्ति को बढ़ाती है, कोई मानसिक शांति देती है, और कोई स्वास्थ्य से जुड़ी होती है. इन सबके बीच ईशान और उत्तर दिशा के बीच की जो जगह होती है, वहां कुछ बेहद खास बातों का ज़िक्र किया गया है, खासतौर पर “विश्वकर्मा प्रकाश” जैसे पुराने ग्रंथों में. ईशान और उत्तर के बीच की दिशा एक ऐसी जगह है जिसे अनदेखा नहीं करना चाहिए. यह दिशा आपको बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक सरल लेकिन प्रभावशाली रास्ता दिखा सकती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं इंदौर निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.
इस ग्रंथ में सीधा उत्तर या ईशान दिशा की नहीं, बल्कि उनके बीच की दिशा की बात की गई है. आज के नक्शों में इसे नॉर्थ-नॉर्थ ईस्ट यानी उत्तर-उत्तरपूर्व कहा जा सकता है, पर पुराने ग्रंथों में इसे उस नाम से नहीं जाना गया. वहां सिर्फ इतना कहा गया है कि उत्तर और ईशान के बीच की जगह बहुत उपयोगी है, खासकर सेहत के लिए.
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इस क्षेत्र को दवा रखने की जगह बताया गया है. सवाल उठता है ऐसा क्यों कहा गया? इसके पीछे एक सीधा सा कारण है. वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर की ऊर्जा यानी एनर्जी वहां सबसे ज़्यादा संतुलित होती है. यह जगह बहुत शांत और हल्की ऊर्जा से भरपूर मानी जाती है. जब कोई चीज़ वहां रखी जाती है, जैसे कि दवाइयां, तो उनका असर बेहतर तरीके से शरीर पर होता है.
कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिशा में रखी गई दवाओं की “कंपन शक्ति” यानी वाइब्रेशन लंबे समय तक बनी रहती है. इसका सीधा असर आपके शरीर पर होता है और दवाइयों का असर तेज़ और स्थिर दोनों तरह से होता है. इसी वजह से पुराने समय से इस दिशा को सेहत से जोड़कर देखा गया है.
आज के समय में जब हम फ्लैट या अपार्टमेंट में रहते हैं, तब हर दिशा का सही इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है, लेकिन अगर किसी के पास विकल्प है, तो दवाइयों को उत्तर और ईशान के बीच की दिशा में रखना एक अच्छा फैसला हो सकता है.
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कुछ लोग इसे अंधविश्वास समझ सकते हैं, पर वास्तु केवल धर्म या परंपरा नहीं है. इसमें विज्ञान का भी एक पहलू है जैसे सूरज की रोशनी, वायु प्रवाह, और ऊर्जा के प्राकृतिक नियम. जब हम इन्हें समझकर अपने घर में अपनाते हैं, तो फायदा नज़र आता है.
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