Home Life Style ये सफेद रंग की मिठाई है एनर्जी का पावरहाउस, गर्मियों में देती है कूलिंग इफेक्ट, खाते ही थकान गायब!

ये सफेद रंग की मिठाई है एनर्जी का पावरहाउस, गर्मियों में देती है कूलिंग इफेक्ट, खाते ही थकान गायब!

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ये सफेद रंग की मिठाई है एनर्जी का पावरहाउस, गर्मियों में देती है कूलिंग इफेक्ट, खाते ही थकान गायब!

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पलामू. देश के अलग-अलग क्षेत्रों के अपने-अपने खास व्यंजन होते हैं. हर जगह का खान-पान, वहां की परंपराएं भी अलग होती हैं जो उस जगह को एक पहचान देती हैं. झारखंड-बिहार में भी ऐसे कई व्यंजन हैं जो अपने क्षेत्र में आज भी प्रसिद्ध हैं. इसी क्रम में बाजार में मिलने वाली ये सफेद रंग की मिठाई शरीर को ठंडक और तरोताजा बना देती है. यह मिठाई एनर्जी से भरपूर है, जिसे खाने के बाद आपको तरोताजा महसूस होगा.

थकान दूर करता है
हम बात कर रहे हैं बताशे की. बताशा एक ऐसी मिठाई है जिसमें थकान दूर करने की ताकत होती है. यह मिठाई चीनी और गुड़ से तैयार होती है. आज भी इस मिठाई की डिमांड देखी जाती है हालांकि पहले के समय में यह काफी प्रसिद्ध थी. जब कोई लंबी दूरी की यात्रा करके आता था, तब उसे यह मिठाई दी जाती थी. पहले यातायात के साधन बेहद कम थे, जिस वजह से लोगों को लंबी दूरी की यात्रा करने पर थकान हो जाती थी. वहीं इस मिठाई को खिलाने के बाद थकान दूर हो जाती थी.

बताशा खाने से मिलती है एनर्जी
आयुर्वेद के जानकार पवन पुरुषार्थी ने लोकल 18 को बताया कि पहले के समय में लोग लंबी दूरी की यात्रा करके आते थे. उस जमाने में यातायात की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी. उस जमाने में और आज भी सुदूरवर्ती क्षेत्रों में इस मिठाई की डिमांड है, जो कि मेहमाननवाजी के लिए दी जाती थी, जिसे खाने के बाद एनर्जी मिलती है.

चीनी, गुड़ के घोल से होता है तैयार
वे आगे कहते हैं कि, यह एक ऐसी मिठाई है जो चीनी और गुड़ के घोल से तैयार होती है. इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा और ग्लूकोज की मात्रा होती है, जिसे ठंडे पानी के साथ पीने पर शरीर को एनर्जी मिलती है, लोग थकान भूल जाते हैं. इसका स्वाद तब बढ़ जाता है जब किसी को जोर की प्यास लगी हो और उसे पानी के साथ बताशा दिया जाए. तब वह बड़े शिद्दत के साथ इसका स्वाद लेकर मज़े से खाते हैं.

इस वजह से चलन से गायब हुई यह मिठाई
एक्सपर्ट डॉ. डी. एस. श्रीवास्तव ने लोकल 18 को बताया कि इसका चलन पहले के समय में बहुत ज्यादा था, यह खाने में भी स्वादिष्ट लगता है. हालांकि आज के दौर में लोग इसे खाना या मेहमाननवाजी में प्रयोग नहीं करते, कारण कि जगह-जगह मिठाई और समोसे की दुकानें मिल जाती हैं. वहीं लोगों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो गई है, तो इस कारण इसका चलन भी कम हो गया है, मगर सुदूरवर्ती क्षेत्र में आज भी लोग इसे खाते हैं.

100 रुपए में उपलब्ध
बता दें कि पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के शहर बाजार में यह मिठाई मिलती है, जहां की दर्जनों दुकानों में इसकी कीमत 100 रुपए किलो है. शहर बाहर स्थित मिठाई दुकान संचालक रणधीर कुमार बताते हैं कि वह 1984 से बताशा बेच रहे हैं. पहले के जमाने में इसकी डिमांड बहुत अधिक थी, मगर धीरे-धीरे इसका चलन खत्म होता गया. उन्होंने कहा कि उस जमाने में 12 रुपए किलो के दर से बिक्री करते थे. वहीं आज इसका रेट 100 रुपए किलो हो गया है. ज्यादातर लोग शादी-विवाह में इसकी खरीदारी करते हैं.

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