Home National सफरनामाः 1983 में आई पहली Maruti 800, कंपनी तो 12 साल पहले ही बन गई थी, फिर कहां लगा इतना समय

सफरनामाः 1983 में आई पहली Maruti 800, कंपनी तो 12 साल पहले ही बन गई थी, फिर कहां लगा इतना समय

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सफरनामाः 1983 में आई पहली Maruti 800, कंपनी तो 12 साल पहले ही बन गई थी, फिर कहां लगा इतना समय

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हाइलाइट्स

मारुति और सुजुकी में करार 1981 में हुआ.
इसके बाद 1983 में लॉन्च हुई मारुति 800.
देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ियों में से एक रही मारुति 800.

नई दिल्‍ली. मारुति सुजुकी आज देश की ही नहीं दुनिया भर की जानी मानी कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में से एक है. दुनिया भर के 60 से भी ज्यादा देशों में मारुति सुजुकी की गाड़ियां एक्सपोर्ट की जाती हैं. अपनी पहली कार मारुति 800 से शुरुआत करने वाली मारुति सुजुकी हर दौर में आम आदमी की कार के नाम से जानी गई और इस कंपनी ने कभी भी पीछे पलट कर नहीं देखा. मारुति की पहली कार 800 ने बाजार में 1983 में एंट्री ली और खुद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसकी चाबी पहले कस्टमर हरपाल सिंह को सौंपी थी. लेकिन क्या आप जानते हैं इस कंपनी की स्‍थापना करीब 12 साल पहले ही कर दी गई थी.

दरअसल इंडियन ऑटोमोबाइल बाजार में पहली कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का सपना संजय गांधी ने देखा था. 1971 में संजय गांधी ने इस कंपनी की नींव रखते हुए कंपनी एक्ट के तहत मारुति लिमिटेड का गठन किया. संजय गांधी खुद इस कंपनी के पहले मैनेजिंग डायरेक्टर भी थे. संजय ने इस कंपनी को चलाने की लाख कोशिशें कीं और कई बार कारों को डिजाइन किया गया, उनके प्रोटोटाइप बनाए गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. कंपनी लगातार घाटे में जाती रही और कोई भी गाड़ी नहीं बना सकी.

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फिर हुई सुजुकी की एंट्री
1980 में एक विमान हादसे में अचानक संजय गांधी का निधन हो गया. इसके साथ ही मारुति की कार आने का सपना भी बस सपना ही रहता दिखने लगा. लेकिन केंद्र सरकार ने इसके बाद कंपनी को बचाने और संजय का सपना पूरा करने के लिए जापानी कंपनी सुजुकी के साथ 1981 में करार किया. इस करार के तहत कंपनी में सुजुकी के साथ ही केंद्र सरकार की भी हिस्सेदारी थी. हालांकि 2003 में केंद्र ने अपनी हिस्सेदारी को बेच दिया और अब सरकार का इस कंपनी में कोई दखल नहीं है.

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संजय गांधी की अगुवाई में कुछ इस तरीके की पहली कार मारुति ने बनाई थी लेकिन ये कभी बिकने के लिए जारी नहीं हुई. (फोटो साभार ट्वीटर)

फिर आई 800 और बदल दिया बाजार
1983 से पहले तक देश में आम आदमी के लिए कोई भी कार नहीं थी. हिंदुस्तान मोटर्स की अंबेसेडर और कॉन्टेसा कारें बड़े नेताओं या सेठों की पहचान हुआ करती थीं. बड़े घराने वाले विदेशी कारों को इंपोर्ट करवाते थे. आम आदमी तो हमारा बजाज या फिर थोड़ा ज्यादा पैसा है तो बुलेट, राजदूत या लेंबरेटा तक सीमित था. फिर एंट्री ली मारुति 800 ने और कार अब सपना नहीं रह गया था. आम आदमी ने इस कार को हाथों हाथ लिया. देखते ही देखते मारुति 800 देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में से एक हो गई और कई सालों तक ऐसा ही रहा.

जिस कंपनी को एक समय पर सरकार बंद करने का सोच रही थी, संजय गांधी ने भी करीब 10 साल तक इस कंपनी के साथ दिन रात एक करने के बाद निराश होकर ऐसा ही विचार बनाया था, आज वो कंपनी देश की नहीं दुनिया की नामी और बड़ी कंपनियों में से एक है.

Tags: Auto News, Car Bike News, Indira Gandhi, Maruti Alto 800, Maruti Suzuki

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