Home National मुझे अपनी शहादत मंजूर थी, मदनी के बोल पर छिड़ा ‘धर्मयुद्ध’, जैन मुनि ने दी चुनौती

मुझे अपनी शहादत मंजूर थी, मदनी के बोल पर छिड़ा ‘धर्मयुद्ध’, जैन मुनि ने दी चुनौती

0
मुझे अपनी शहादत मंजूर थी, मदनी के बोल पर छिड़ा ‘धर्मयुद्ध’, जैन मुनि ने दी चुनौती

[ad_1]

ऐप पर पढ़ें

जमीयत उलेमा ए हिंद के अधिवेशन में अरशद मदनी के ओम और अल्लाह को एक ही बताए जाने के विवाद पर धर्म युद्ध छिड़ गया है। मंच पर ही अरशद मदनी का विरोध करने वाले जैन मुनि आचार्य लोकेश ने अब ट्वीट करके भी ऐतराज जताया है। उन्होंने अपने भाषण का एक हिस्सा ट्वीट करते हुए लिखा है कि मुझे अपनी शहादत मंजूर थी, लेकिन आंखों के सामने अपने धर्म और संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता। उन्होंने लिखा, ‘मैं अपनी आँखों के सामने अपने धर्म, संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता,इसलिए विरोध किया, शास्त्रार्थ की चुनौती दी।’

ओम और अल्लाह पर अड़े मदनी, जैन मुनि लोकेश के मंच छोड़ने को बताया गलत

बता दें कि लोकश मुनि ने मंच से ही कहा था कि हम अरशद मदनी के बयान से कतई सहमत नहीं हैं। उन्होंने एकता और सद्भावना के सम्मेलन को पलीता लगा दिया है। यही नहीं अरशद मदनी के बयान पर मुस्लिम वर्ग के भी कई लोगों ने ऐतराज जताया है। संभल से सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि मदनी का बयान एकदम गलत है। उन्होंने कहा कि ओम और अल्लाह एक नहीं हैं। अल्लाह मुसलमानों का है और ओम हिंदुओं का है। इन दोनों को एक नहीं कहा जा सकता। इसलिए मदनी का बयान पूरी तरह से गलत है। 

जैन मुनि ने मदनी के बयान के तुरंत बाद अपना ऐतराज जताया था। उन्होंने कहा था, ‘अरशद मदनी के निमंत्रण भारतीय सर्व धर्म संसद के सभी रहनुमा यहां आए। बड़ी प्यार मोहब्बत की बात हमारे चिदानंद सरस्वती महाराज ने की। सिख समाज के परमजीत सिंह चंडोक ने भी प्यार भरी बातें कीं। मैंने यहां प्यार का माहौल बनाया। लेकिन इन सबके बाद मदनी जी का जो भाषण हुआ, उससे हम सहमत नहीं है। यदि केवल लोगों को जोड़ने की बात करनी है तो करिए, लेकिन ये चिकनी कहानी जो सुनाई है, उससे 4 गुना कहानी मैं सुना सकता हूं।’

जैन मुनि बोले- एकता के सम्मेलन को लगा दिया पलीता

आचार्य लोकेश ने अरशद मदनी को शास्त्रार्थ की भी चुनौती दी। उन्होंने कहा, ‘मदनी साहब आप मेरे पिता तुल्य हैं। मैं आपको शास्त्रार्थ को चुनौती देता हूं, आप चाहें तो दिल्ली में आ सकते हैं। सहारनपुर में बुलाएंगे तो मैं वहां भी आ जाऊंगा। ओम, अल्लाह और मनु की कहानी सुनाकर आपने एकता और सद्भावना के सम्मेलन को पलीता लगा दिया।’  

[ad_2]

Source link