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वाराणसी मे काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) से सटी ज्ञानवापी (Gyanvapi) परिसर में दृश्य व अदृश्य मजार पर चादरपोशी और सालना उर्स मनाने की अनुमति मांगने संबंधी केस में पक्षकार बनने के लिए राखी सिंह ने अधिवक्ता शिवम गौड़ के जरिए अर्जी दाखिल की है।
सिविल जज सीनियर डिविजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट) महेंद्र पांडेय की अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता ने मुस्लिम पक्ष की अर्जी को खारिज करने की भी मांग की है। अदालत ने सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तिथि तय की है। इस मामले में 10 लोगों ने पक्षकार बनने के लिए अर्जियां दी थीं। अदालत पिछली सुनवाई में छह अर्जियों को आधारहीन पाते हुए खारिज कर चुकी है।
अधिवक्ता शिवम गौड़ ने बताया कि गत वर्ष जुलाई में लोहता के मुख्तार ने ज्ञानवापी की पश्चिमी दीवार के तरफ मजार होने का दावा किया है। उन्होंने मजार पर उर्स करने की इजाजत मांगी है। गौड़ ने कहा कि मुख्तार जिसे मजार का हिस्सा बता रहे हैं, दरअसल वह मंदिर की शिला है। वह पूरा परिक्षेत्र भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान का है। मुख्तार का दावा भ्रामक है।
जुनैद और जुबैद शाह की थी वहां मजार
मुख्तार ने कहा कि जिस जगह पर लोग शृंगारगौरी होने का दावा कर रहे हैं, वहां नीचे जुबैद शाह और जुनैद शाह की मजार थी। परिसर में सालाना उर्स होता था। 1937 के दीन मोहम्मद केस का हवाला देते हुए मुख्तार ने कहा कि वहां मजार थी, यह बात पहले ही कोर्ट में साबित हो चुकी है।
क्या है प्रकरण
लोहता के मुख्तार अहमद अंसारी, कच्चीबाग के अनीसुररहमान व तीन अन्य ने कोर्ट से गुजारिश की है कि ज्ञानवापी परिसर स्थित दृश्य व अदृश्य मजार पर चादर चढ़ाने, फातिहा पढ़ने और वार्षिक उर्स के आयोजन के अधिकार से वंचित न किया जाए। साथ ही यह आयोजन कराने की अनुमति देने के लिए आदेशित किया जाए।
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