Home Life Style महिला दिवस 2023: सपने, विश्वास, कोशिशें और उड़ान… मिसेज इंडिया बनीं डॉक्टर कर्णिका तिवारी के सक्सेस मंत्र

महिला दिवस 2023: सपने, विश्वास, कोशिशें और उड़ान… मिसेज इंडिया बनीं डॉक्टर कर्णिका तिवारी के सक्सेस मंत्र

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महिला दिवस 2023: सपने, विश्वास, कोशिशें और उड़ान… मिसेज इंडिया बनीं डॉक्टर कर्णिका तिवारी के सक्सेस मंत्र

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Internationl Women’s Day 2023: हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले… सपने देखना और उन्हें पूरा करना दो अलग-अलग बातें हैं लेकिन ऐसा भी नहीं है कि दोनों में जमीन आसपान का फर्क माना जा! जब तक सपना आंखों में न बसे तब तक कोशिश नहीं होती, और जब तक कोशिश नहीं होती तब तक सफलता हाथ नहीं लगती. इस बात को साबित करती हैं कुछ ही हफ्ते पहले हुए मिसेज इंडिया कॉन्टेस्ट (Mrs India 2022-23) में विजेता चुनी गईं डॉक्टर कर्णिका तिवारी. कर्णिका पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस ( International Women’s Day) के मौके पर डॉक्टर कर्णिका तिवारी ने हमसे न सिर्फ अपने इस मुकाम तक के सफर के बारे में बात की, बल्कि बातों ही बातों में ये भी बताया कि सफलता के असल मंत्र होते क्या हैं.. आखिर कौन सा जज्बा सब बाधाओं पर भी भारी पड़ता है और खुद की लिमिटेशन्स को कैसे पार किया जा सकता है.

आपको बता दें कि फरवरी की शुरुआत में राजस्थान के रणथंभौर में साल 2022-23 मिसेज इंडिया ब्यूटी कॉन्टेस्ट ग्रैंड फिनाले हुआ. इस मुकाबले में कई धुरंधर महिलाओं के बीच से डॉक्टर कर्णिका तिवारी को मिसेज इंडिया घोषित किया गया. मिसेज इंडिया के इस फाइनल में 21 से 70 साल महिलाओं की महिलाओं ने ताज के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी. एक समय में कर्णिका का वजह 85 किलो पहुंच गया था, लेकिन योग, व्यायाम और टाइम मैनेजमेंट के बल पर, बिना रुके लगातार कोशिश करते हुए उन्होंने अपने आपको इस प्रतियोगिता के लिए तैयार किया.

मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत से चलती गईं…

कर्णिका से जब हमने पूछा कि आप तो फुलटाइम गाइनीकॉलजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) हैं, दो बड़े होते बच्चों की मां हैं, और अन्य सामाजिक कार्यों से भी जुड़ी रहती हैं, कैसे कर पाती हैं ये सब. और अब आपने मिसेज इंडिया का ताज भी मेहनत मशक्कत के साथ हासिल कर लिया है. कैसे संभव हुआ एक साथ इतना कुछ कर पाना… इन सहज सवालों का जवाब देते हुए कर्णिका ने बताया- मिसेज इंडिया में पार्टिसिपेट करने का ख्याल मेरी मां को 2020 में आया था, मेरी मां ने ही मिसेज इंडिया प्रतियोगिता का फॉर्म भरा था. 2020 में मिसेज यूपी के लिए भी फॉर्म भरा था. मां ने ही मेरी आंखों में ये सपना बोया. कर्णिका कहती हैं कि मुझे यह कभी नहीं लगा था कि मैं यह प्रतियोगिता जीत पाऊंगी. मुझे बस इसमें पार्टिसिपेट करना था, अपने आत्मबल को और मजबूत करने के लिए और पता नहीं कैसे बस में बस आगे बढ़ती गई. (यह भी पढ़ें- महिला दिवस की शुभकामनाएं दें कुछ इन लफ्जो में)

womens day 2023, Mrs India Dr Karnika Tiwari

‘चार दिन चली प्रतियोगिता, बीच में छोड़कर आ जाती अगर….’

अपने काम को समर्पित कर्णिका कहती हैं कि प्रतियोगिता के 4 दिन पहले तक मेरा इसमें भाग लेना पक्का नहीं था क्योंकि मेरे लिए मेरे मरीज मेरी पहली प्रायॉरिटी हैं. लेकिन किस्मत की बात है कि मेरे सारे पेशेंट की डिलीवरी उस समय हो गई थी. वह बताती हैं कि कुछ डिलीवरीज और थीं जोकि फरवरी में थीं और मैं बिल्कुल क्लियर थी कि अगर किसी पेशेंट की डिलीवरी इस बीच आई तो प्रतियोगिता वहीं बीच में छोड़कर वापस आ जाऊंगी. (ये भी पढ़ें- वाइट डिस्चार्ज खुजली-जलन को न करें इग्नोर, डॉक्टर से जानें लक्षण-कारण, समय से करा लें इलाज)

उन्होंने बताया, इस तरह की प्रतियोगिता में बहुत सारे इवेंट्स होते हैं. इसमें कुल मिलाकर के 14 से 15 इवेंट्स हुए थे, हमें सुबह 5:30 से 6:00 बजे तक उठना होता था और डेली चार-पांच राउंड्स होते थे. टैलेंट राउंड, स्टोरी ऑफ माय लाइफ, जंगल सफारी, फूड कॉर्नर, एक टूरिज्म कनेक्ट राउंड.. कई बार डर भी लगा कि इतने सारे टैलेंटेड लोगों के बीच मुकाबला बेहद टफ है..लेकिन मेरे बच्चों और परिवार की दुआएं और सपोर्ट ने मुझे रुकने नहीं दिया और खुद पर भरोसा कायम करवाए रखा.

प्रफेशन के साथ पैशन को कैसे मैनेज करें महिलाएं…

महिला दिवस के मौके पर क्या कहना चाहेंगी कुछ कर गुजरने का सपना देखने वाली महिलाओं को? मां बनने के बाद कई बार कई जिम्मेदारियों के चलते महिलाएं अपने सपनों की तिलांजलि दे देती हैं… आप भी इस मोड़ से गुजरी होंगी… यह पूछे जाने पर वह बताती हैं कि यह सही बात है कि ऐसा होता है. महत्वाकांक्षाएं कम हो जाती हैं और वे उलझ कर रह जाती हैं लेकिन परिवार के सपोर्ट से आप अपने किसी भी प्रकार के सपने को हासिल करने की कोशिश कर सकती हो.

बोलीं कर्णिका, ‘सशक्त नारी, सशक्त भारत..’

महिला दिवस के मौके पर वह कहती हैं कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ तो भारत सरकार का नारा है लेकिन मैं कहूंगी कि पढ़ेगी बेटी तो बचेगी बेटी. एक औरत अगर खुश रहेगी तो प्रकृति खुश रहेगी क्योंकि सशक्त महिला से परिवार भी सशक्त होगा और देश भी.. इसलिए हमें अपने आसपास ऐसा माहौल तैयार करना होगा कि वे खुश और मजबूत बन सकें, रह सकें.

Tags: International Women’s Day, Lifestyle, Success Story, Womens day, Womens Success Story

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