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अतीक अहमद के खिलाफ दर्ज 101 मुकदमों में किसी केस में सजा नहीं हुई थी। मंगलवार को पहली बार अतीक अहमद को राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल को अगवा करके झूठा बयान दिलाने के मामले में कोर्ट ने सजा सुनाई है। 2007 में इस मुकदमे की जांच दरोगा नरेंद्र सिंह परिहार ने की थी। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान को फोन पर तत्कालीन इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि कैसे मुकदमे की जांच के दौरान उन्हें न केवल जान से मारने की धमकी दी गई, बल्कि गाड़ी और बंगला दिलाने का लालच भी दिया गया। धमकी पर उन्होंने कोर्ट में एक अर्जी दी थी कि अगर सड़क हादसे में भी उनकी मौत हुई तो उसका जिम्मेदार अतीक होगा।
अतीक अहमद के खिलाफ पांच मुकदमों की जांच करने वाले इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह परिहार सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि 2007 में उमेश पाल को अपहरण करने का मुकदमा दर्ज हुआ तो उसकी जांच पहले कृष्ण कुमार मिश्र ने की थी। उसके बाद मुझे जांच मिली। एफआईआर में ही पूरी कहानी बयां थी। जब इस केस की जांच शुरू हुई तो उस वक्त अतीक अहमद फरार था। उसकी गिरफ्तारी के बाद वह अतीक का बयान लेने जेल में पहुंचे। उस वक्त अतीक की तूती बोलती थी। अतीक ने कहा कि जो तुम्हारे अधिकारी ने कहा है, उसे मेरे बयान में दर्ज कर लो। सत्ता बदलते ही सरकार यह मुकदमा वापस ले लेगी।
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रेप केस में फंसाने की मिली धमकी
बकौल नरेंद्र सिंह परिहार, कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। लैंड क्रूजर गाड़ी जब्त करने से लेकर अतीक अहमद की बनाई करोड़ों की अवैध संपत्ति पर कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस गैंगस्टर एक्ट में प्रॉपर्टी कुर्क करने लगी। इस विवेचना के दौरान अतीक अहमद के उन करीबियों का नाम भी सामने आया जो पर्दे के पीछे थे। लगातार कार्रवाई करने पर अतीक अहमद के करीबियों ने मुझे धमकी देनी शुरू कर दी। मुझे रेप केस में फंसाने की धमकी भी दी जाने लगी।
नरेंद्र सिंह परिहार बताते हैं कि अतीक अहमद से बचने के लिए उन्होंने सादे पेपर पर अपने हस्ताक्षर से लिखा था कि उनकी मौत के लिए अतीक अहमद जिम्मेदार होगा। उसकी एक कॉपी अपने पास में और दूसरी अपनी अटैची में रखी थी। ताकि अगर कहीं से भी उन पर हमला हुआ तो यह राज खुल सके।
अपहरण केस की विवेचना के बाद जब नरेंद्र सिंह परिहार ने अतीक अहमद, अशरफ समेत 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया तो उन्हें फिर धमकी मिलने लगी। इस पर नरेंद्र सिंह परिहार ने अतीक के एक करीबी से कहा कि वह 152 भाई-भतीजे हैं। अगर उन पर हमला हुआ तो उनका पूरा परिवार चकिया में कोहराम मचा देगा। अतीक अहमद के परिवार में कोई कंधा देने वाला नहीं बचेगा। नरेंद्र सिंह परिहार के इस बयान के बाद अतीक के गुर्गे उनके पास जाना बंद कर दिए। नरेंद्र सिंह परिहार पर यह दबाव डाला गया था कि इस मुकदमे में नामजद आरोपी व अतीक के करीबी वकील का नाम विवेचना से निकाल दिया जाए।
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