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Asst Profs appointment: बिहार सरकार ने असिस्टैंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर 24 फरवरी के पटना हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सरकार को आदेश दिया था कि भर्ती का फ्रेश नोटिफिकेशन जारी किया जाए। आदेश में कहा गया था कि बैकलॉग पदों के लिए अगल से नोटिफिकेशन जारी किया जाए। इस मामले से बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टैंट प्रोफेसर नियुक्ति अटक गई थी।
मामले में राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस मधुरेंद्र कुमार की पीठ के समक्ष एलपीए फाइल करते एडिशनल एडवोकेट जनरल सरोज कुमार सिंह ने कहा कि न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की एकल पीठ बिहार विश्वविद्यालय अधिनिमय-1976 और बिहार आरक्षण अधिनयिम- 1991 को समझने में विफल रही है। पीठ ने पाया है कि सभी विश्वविद्यालय एक इकाई के रूप में ट्रीट किए जाएं।
इससे पहले के आदेश में इस तथ्य और कानून को स्वीकार नहीं किया गया कि प्रत्येक विश्वविद्यालय अलग स्वायत्त निकाय है। प्रत्येक विश्वविद्यालय का वाइस चांसलर काननू के अनुसार भर्ती अधिकारी होता है।
हालांकि बेंच ने उन अभ्यर्थियों को राहत दिया था जिनकी नियुक्ति पहले हो चुकी थी। संबंधित प्रावधानों के तहत ऐसे अभ्यर्थियों को बैकलॉग रिक्तियों के सापेक्ष समायोजित किया जाएगा।
आपको बता दे कि बीएसयूएससी ने 52 विषयों के असिस्टैंट प्रोफेसर पद की कुल 4,638 रिक्तियों के लिए भर्ती विज्ञापन विधानसभा चुनाव के पहले 23 सितंबर 2020 को जारी किया था। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। आयोग ने अब तक करीब 29 विषयों की रिक्तियों के लिए इंटरव्यू भी पूरा कर लिया है। इसी बीच पटना हाईकोर्ट का आदेश उस वक्त आया जब बड़े पैमाने पर अभ्यर्थियों का साक्षात्कार हो चुका था।
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