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बिहार लोक सेवा आयोग ने 171 शिक्षक अभ्यर्थियों को एक वर्ष और 413 को तीन वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। इन अभ्यर्थियों ने (टीआरई-1) के परिणाम पर तथ्यहीन व भ्रामक आरोप लगाए थे। आयोग की ओर से इन अभ्यर्थियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गयी। ये अभ्यर्थी आयोग की ओर से आयोजित किसी भी परीक्षा में अब शामिल नहीं हो पायेंगे। बिहार लोक आयोग ने जारी आदेश में बताया कि टीआरई -1 के परीक्षाफल प्रकाशन के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने दूरभाष और आयोग में व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर बताया था कि प्रकाशित परीक्षाफल के कटऑफ से उनका प्राप्तांक अधिक होने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ है। आयोग की ओर से इस संबंध में 29 नवंबर से 12 दिसंबर तक शपथपत्र और साक्ष्य के साथ ऑनलाइन आपत्ति मांगी गयी।
1756 अभ्यर्थियों की ओर से आपत्ति आवेदन प्राप्त हुए। जांच में पाया गया कि इनमें से 741 आवेदन बिना शपथ पत्र के समर्पित था। आयोग की ओर स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद 413 अभ्यर्थियों की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। बीपीएससी की ओर से कहा गया है कि इन अभ्यर्थियों की ओर से असफलता को छुपाने और आयोग की छवि को धूमिल करने की चेष्टा की गई है। बीपीएससी की सभी परीक्षाओं के लिए अगले तीन वर्ष तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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171 ने गलती मानी तो एक साल के लिए लगा प्रतिबंध
171 अभ्यर्थियों की ओर से स्पष्टीकरण आयोग को समर्पित किया गया, जिसमें यह बताया गया कि उनसे अनजाने में गलती हो गयी है। कहा गया कि परीक्षा में फेल होने के कारण अत्याधिक दबाव और घबड़ाहट में शपथ पत्र नहीं दे सके। कुछ ने भूलवश शपथ पत्र अपलोड नहीं करने की बात कही। गलती मानते हुए स्पष्टीकरण से मुक्त करने का अनुरोध किया गया था। बीपीएससी ने इन सभी अभ्यर्थियों को एक साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया।