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ISRO यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वैज्ञानिक रोवर प्रज्ञान की तेज चहलकदमी को बेहद अहम बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि चांद की सतह पर रोवर पहले से तय 30 मीटर की दूरी तय नहीं कर रहा है। फिलहाल, 10 दिनों का समय बाकी है (चांद पर एक दिन के बराबर पृथ्वी पर 14 दिन होते हैं) और इस दौरान ISRO ज्यादा से ज्यादा दूरी तय करना चाहता है।
ISRO के स्पेस एप्लीकेशन्स सेंटर (SAC) के निदेशक नीलेश एम देसाई बताते हैं कि मून मिशन के तीन सबसे बड़े उद्देश्य हैं। इनमें चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग, प्रज्ञान रोवर की मूवमेंट या गतिविधि और लैंडर और रोवर पर लगे पेलोड्स के जरिए डेटा हासिल करना शामिल है। उन्होंने कहा, ‘हमारे दो मकसद पूरे हो गए हैं, लेकिन तीसरा मकसद अभी जारी है।’
उन्होंने कहा, ‘हमारा ध्यान इस बात पर है कि प्रज्ञान चांद की सतह पर ज्यादा से ज्यादा दूरी तय कर ले, ताकि वह ज्यादा प्रयोग कर सके और पृथ्वी के लिए डेटा जुटाया जा सके।’
देसाई ने बताया ‘हमारे पास सिर्फ 14 दिने थे, जो चांद पर एक दिन के बराबर थे और चार दिन पूरे हो चुके हैं। हम बचे 10 दिनों में ज्यादा प्रयोग कर सकें, यह जरूरी होगा। इन 10 दिनों में हमें ज्यादा से ज्यादा काम करना है और ISRO वैज्ञानिक इसपर काम कर रहे हैं।’ उन्होंने बताया कि रोवर ने चांद की सतह पर सिर्फ 12 मीटर की दूरी तय की है और हर रोज 30 मीटर की योजना तैयार की गई थी।
उन्होंने बताया कि कुछ सेवाएं यहां उपलब्ध नहीं होने के चलते हम रोवर की गतिविधियों को लेकर भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं, जिसकी वजह से विजिबिलिटी में दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा, ‘यही वजह है कि बचे हुए दिनों में 300-400 मीटर की दूरी रोवर के जरिए पूरी किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।’ वैज्ञानिक ने जानकारी दी कि लैंडर विक्रम पर मौजूद चार पेलोड अपना काम कर रहे हैं और शुरुआती ऑपरेशन पूरे किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा, ‘रेडियो एनाटॉमी ऑफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव लोनोस्पीयर एंड एटमॉस्पियर (RAMBHA) समेत चार पेलोड्स के शुरुआती ऑपरेशन्स पूरे हो चुके हैं। ये चांद पर प्लाज्मा और आयन एमिशन की जांच करेंगे।’
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