Home National Chandrayaan 3: ISRO ने व‍िक्रम लैंडर की दोबारा चंद्रमा पर क्‍यों कराई सॉफ्ट लैंड‍िंग 10 प्‍वाइंट में जानें सबकुछ

Chandrayaan 3: ISRO ने व‍िक्रम लैंडर की दोबारा चंद्रमा पर क्‍यों कराई सॉफ्ट लैंड‍िंग 10 प्‍वाइंट में जानें सबकुछ

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Chandrayaan 3: ISRO ने व‍िक्रम लैंडर की दोबारा चंद्रमा पर क्‍यों कराई सॉफ्ट लैंड‍िंग 10 प्‍वाइंट में जानें सबकुछ

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-3 मिशन के विक्रम लैंडर को अपने इंजनों को फिर से चालू करने का आदेश दिया और इसे लगभग 40 सेंटीमीटर तक ऊपर उठाया और आगे 30-40 सेंटीमीटर की दूरी पर फ‍िर से सॉफ्ट लैंड‍िंग कराई. स्‍पेस एजेंसी ने बताया क‍ि लैंडर ने पिछले लैंडिंग स्थान ‘शिव शक्ति प्‍वाइंट’ से 30 से 40 सेमी की दूरी पर सुरक्षित लैंडिंग हासिल की. हालांकि, सवाल उठता है: इसरो ने चंद्रमा पर लैंडर की दोबारा सॉफ्ट लैंडिंग क्यों कराई?

14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष स्टेशन से LVM3 रॉकेट की चौथी परिचालन उड़ान के रूप में लॉन्च किया गया. भारत का चंद्र मिशन 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर अपने इच्छित लैंडिंग स्थल के भीतर सफलतापूर्वक लैंड‍िंग की. इसके बाद उस स्‍थान को शक्ति प्वाइंट शिव नाम दिया गया.

इसरो ने बताया क‍ि कुछ सेंटीमीटर ऊपर उठकर हॉप प्रयोग को सफलतापूर्वक अंजाम देकर विक्रम लैंडर ने अपने सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने आगे बताया कि यह ‘किक-स्टार्ट’ की त‍िकड़म भविष्य में उसके लौटने पर सैंपल का और मानव मिशनों का अध्ययन करने में सहायता करेगा.

इसरो ने कहा क‍ि यह ‘किक-स्टार्ट’ भविष्य के सैंपल वापसी और मानव मिशनों को उत्साहित करता है! इसमें कहा गया है कि सभी प्रणालियों ने नाममात्र का प्रदर्शन किया और स्वस्थ हैं. इसमें कहा गया है क‍ि प्रयोग के बाद तैनात रैंप, सीचीएएसटीई और आईएलएसए को वापस मोड़ दिया गया और सफलतापूर्वक पुन: तैनात किया गया.

लैंडर पर मौजूद पेलोड में से एक ने चंद्रमा की सतह पर एक ‘प्राकृतिक घटना’ का भी पता लगाया है. चंद्रयान-3 के लैंडर में तीन पेलोड हैं. उनकी भूमिका हैं:
पहला. रंभा-एलपी (लैंगमुइर जांच): निकट सतह प्लाज्मा (आयनों और इलेक्ट्रॉनों) के घनत्व और समय के साथ इसके परिवर्तनों को मापने के लिए.
दूसरा. सीचीएएसटीई (चंद्र सतह थर्मोफिजिकल प्रयोग): ध्रुवीय क्षेत्र के पास चंद्र सतह के तापीय गुणों को मापना.
तीसरा. आईएलएसए (चंद्र भूकंपीय गतिविधि के लिए उपकरण): लैंडिंग स्थल के आसपास भूकंप को मापने और चंद्र क्रस्ट और मेंटल की संरचना का चित्रण करने के लिए.

फिलहाल, इसरो के पास किसी मानव मिशन या चंद्रमा सैंपल वापसी की योजना नहीं है. इसके बजाय, इसरो गगनयान परियोजना पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसका उद्देश्य तीन दिवसीय मिशन के लिए तीन सदस्यों के एक दल को 400 किमी की कक्षा में लॉन्च करके और भारतीय लैंडिंग के साथ उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाकर मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं का प्रदर्शन करना है.

अंतरिक्ष एजेंसी ने लिखा है क‍ि महत्व क्या है? : इस प्रक्रिया से भविष्य में ‘सैंपल’ वापसी और चंद्रमा पर मानव अभियान को लेकर आशाएं बढ़ गई हैं. ‘विक्रम’ की प्रणालियां ठीक तरह से काम कर रही हैं और वे ठीक हालत में हैं, लैंडर में मौजूद रैम्प और उपकरणों को बंद किया गया और प्रयोग के बाद पुन: सफलतापूर्वक तैनात किया गया.

आपको बता दें क‍ि चंद्रयान-3 के रोवर ‘प्रज्ञान’ ने चंद्रमा की सतह पर अपना काम पूरा कर लिया है और अब यह निष्क्रिय (स्लीप मोड) अवस्था में चला गया था. इससे कुछ घंटे पहले, इसरो के प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा था कि चंद्रमा पर भेजे गए चंद्रयान-3 के रोवर और लैंडर ठीक से काम कर रहे हैं और चूंकि चंद्रमा पर अब रात हो जाएगी इसलिए इन्हें ‘‘निष्क्रिय’’ किया जाएगा.

इसरो ने सोशल मीड‍िया पर की एक पोस्ट में कहा था क‍ि रोवर ने अपना कार्य पूरा कर लिया है. इसे अब सुरक्षित रूप से ‘पार्क’ (खड़ा) किया गया है और निष्क्रिय (स्लीप मोड) अवस्था में सेट किया गया है. एपीएक्सएस और एलआईबीएस ‘पेलोड’ बंद हैं. इन पेलोड से आंकड़े लैंडर के माध्यम से पृथ्वी पर प्रेषित किए जाते हैं. वर्तमान में रोवर की बैटरी पूरी तरह से चार्ज है और उसका सौर पैनल 22 सितंबर, 2023 को चंद्रमा पर अपेक्षित अगले सूर्योदय पर प्रकाश प्राप्त करने के लिए उन्मुख है.

चीन का चंद्र अन्वेषण मिशन, चांग’ई 6, जो 2024 में लॉन्च के लिए निर्धारित है. चीन का दूसरा सैंपल वापसी मिशन करेगा. नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के पास आर्टेमिस कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य 1972 में अपोलो 17 मिशन के बाद पहली बार चंद्रमा पर मानव उपस्थिति को फिर से स्थापित करना है. आर्टेमिस III एक चालक दल चंद्र अन्वेषण मिशन होगा, लेकिन यह है 2025 से पहले होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि आर्टेमिस II की योजना नवंबर 2024 में बनाई गई है.

भारत ने 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-3 के ‘विक्रम’ लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद इतिहास रच दिया था. भारत चंद्रमा की सतह पर पहुंचने वाला चौथा देश और इसके दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन गया है.

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FIRST PUBLISHED : September 04, 2023, 16:17 IST

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