Home World China Russia In Africa: चीन को अफ्रीका में सोने की लूट पड़ रही भारी, चीनियों की हत्‍या, दोस्‍त रूस की भी नजरें खजाने पर

China Russia In Africa: चीन को अफ्रीका में सोने की लूट पड़ रही भारी, चीनियों की हत्‍या, दोस्‍त रूस की भी नजरें खजाने पर

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China Russia In Africa: चीन को अफ्रीका में सोने की लूट पड़ रही भारी, चीनियों की हत्‍या, दोस्‍त रूस की भी नजरें खजाने पर

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बीजिंग: रविवार को मध्‍य अफ्रीका क्षेत्र (CAR) में सोने की खदान में काम करने वाले नौ मजदूरों की एक आतंकी हमले में मौत हो गई है। इस हमले में दो मजदूर घायल भी हो गए हैं। यहां पर सोने की खदान में काम करने वाले चीनी मजदूरों को एक हमले में निशाना बनाया गया है। हमले को क्षेत्र के विद्रोहियों की तरफ से अंजाम दिए जाने की खबरें हैं लेकिन संगठन ने इससे साफ इनकार कर दिया है। विद्रोहियों ने इस हमले की सारी जिम्‍मेदारी रूस के एक ग्रुप वैगनर पर डाली है। पीड़‍ित वो चीनी मजदूर थे जो गोल्‍ड कोस्‍ट ग्रुप की तरफ से संचालित चिम्बोलो गोल्‍ड माइन में काम कर रहे थे। चीनी अथॉरिटीज इतनी घबराई हुई हैं कि नागरिकों को राजधानी बंगुई के बाहर न जाने की सलाह तक दे दी गई है।

पैर जमाने की कोशिशें
विशेषज्ञों की मानें तो चीन और रूस की तरफ से अफ्रीका में अपने पैर मजबूती से जमाने की कोशिशें हो रही हैं। अपने मकसद में कामयाब होने के ल‍िए दोनों देश प्राकृतिक संसाधनों को हथियाने में लगे हुए हैं। संयुक्‍त राष्‍ट्र (UN) की तरफ से दी गई चेतावनियों के बाद भी दोनों देश सक्रिय हैं। यूएन की तरफ से आगाह किया गया है कि अफ्रीका के सबसे गरीबी देशों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। इस बोझ के तले दबकर ये देश कभी भी बिखर सकते हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़े अफ्रीका सेंटर फॉर स्‍ट्रैटेजिक स्‍टडीज के पॉल नांतुल्या कहते हैं कि अफ्रीका में बड़े तीन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स में से एक चीनी कंपनियों की तरफ से संचालित हो रहा है। वहीं पांच में से एक प्रोजेक्‍ट को चीनी पॉलिसी बैंक की तरफ से आर्थिक सहायता दी जा रही है।
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रूस के भी प्रोजेक्‍ट्स
नांतुल्या ने बताया कि रूस वह देश है जो अफ्रीका को सबसे ज्‍यादा हथियार सप्‍लाई करता है। अब यह देश भी कई तरह के माइनिंग प्रोजेक्‍ट्स में आगे बढ़ने लगा है। रूस की वैगनर कंपनी को कई प्रोजेक्‍ट्स मिले हैं जो कि एक अर्धसैनिक संगठन है। यह संगठन अफ्रीका में रूस के हितों को आगे बढ़ा रहा है। कतर में पिछले दिनों यूएन समर्थित सम्‍मेलन का आयोजन हुआ था। इस सम्‍मेलन में अफ्रीकी देशों के नेताओं ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि उनके देशों के साथ इतना खराब बर्ताव हो रहा है। पश्चिमी देशों की तरफ से अफ्रीका के लिए इनफ्रास्‍ट्रक्‍चर के लिए आर्थिक मदद को कम कर दिया गया है। ऐसे में रूस और चीन के पास वह मौका था जो खाली जगह को भर सकता था।
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कैसे चीन ने किया ‘कब्‍जा’
नांतुल्या के मुताबिक चीन ने उस खाली जगह को महसूस किया और फिर यहां पर निवेश का मन बना लिया। वॉशिंगटन इंस्‍टीट्यूट थिंक टैंक की अन्ना बोर्शचेवस्काया की मानें तो जिस विकास की बात चीन कर रहा है, वह दरअसल उसका कर्ज जाल है। उन्‍होंने कहा कि चीन ने ज्‍यादातर अफ्रीकी देशों को महंगे प्रोजेक्‍ट्स के लिए कर्ज दिया हुआ है। जब ये देश कर्ज की अदायगी नहीं कर पाएंगे तो निश्चित तौर पर चीन उनकी रणनीतिक संपत्तियों पर कब्‍जा कर लेगा। वहीं चीन अक्‍सर इस बात से इनकार कर देता है कि उसने कर्ज का कोई जाल फैलाया हुआ है। चीन के विदेश किन गांग की मानें तो कोई भी साझेदारी अच्‍छी दोस्‍ती और अच्‍छे भरोसे से बनती है।

रूस की ‘बदनाम’ कंपनी
चीन की तरह उसका दोस्‍त रूस भी अब अफ्रीका में अपने कदम बढ़ा रहा है। वैगनर के कई माइनिंग प्रोजेक्‍ट्स यहां चल रहे हैं और यही कंपनी यूक्रेन वॉर में भी सक्रिय है। इस साल जनवरी में अमेरिका ने वैगनर पर मानवाधिकार उल्‍लंघन का आरोप लगाया था। अमेरिका की तरफ से कहा गया था कि वैगनर अफ्रीका के देशों में मौजूद संसाधनों को जबरन निकाल रहा है। फरवरी में ही यूरोपियन यूनियन (EU) ने वैगनर पर CAR, माली, सूडान और यूक्रेन में मानवाधिकार उल्‍लंघन की वजह से नए प्रतिबंध लगे थे। रूस की इस कंपनी पर अलोकतांत्रिक तरीके से काम करने और पर्यावरण को नष्‍ट करने के आरोप लगे हैं। विशेषज्ञों ने अफ्रीकी देशों पर चीनी और रूसी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव की भी निंदा की।

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