Home National Communal Harmony: रांची में यहां है सर्वधर्म की मिसाल, एक चारदीवारी में है मंदिर, मजार, गुरुद्वारा और क्रॉस

Communal Harmony: रांची में यहां है सर्वधर्म की मिसाल, एक चारदीवारी में है मंदिर, मजार, गुरुद्वारा और क्रॉस

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Communal Harmony: रांची में यहां है सर्वधर्म की मिसाल, एक चारदीवारी में है मंदिर, मजार, गुरुद्वारा और क्रॉस

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शिखा श्रेया

रांची. झारखंड की राजधानी रांची से 60 किलोमीटर दूर दुल्ली में सर्वधर्म स्थल है. यहां चारों धर्मों के प्रतीक एक ही चारदीवारी में मौजूद है. अमूमन ऐसा बिरले देखने को मिलता है. एकता के इस प्रतीक स्थल के अंदर दाखिल होने पर बरगद का विशाल पेड़ आपका स्वागत करता है. साथ ही, अगल-बगल पलाश के पेड़ यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करते हैं. इसको देखने के लिए लोग धनबाद, बोकारो, पटना, कोलकाता जैसी जगहों से यहां आते हैं. नूर हसन बाबा की फरमाइश पर यहां गुरुद्वारा व मंदिर बनी थी. इस जगह के बारे में रोचक तथ्य है कि नूर हसन बाबा अंग्रेजों के शासन काल के दौरान कलकता से यहां आकर रहने लगे थे.

अंग्रेजों पर नूर हसन बाबा का काफी प्रभाव था. बाबा को कव्वाली गाने का शौक था जिसके प्रशंसक अंग्रेज भी थे. कुछ समय के लिए बाबा कोलकाता गये जहां उनका इंतकाल (निधन) हो गया. इसके बाद, उनके बेटों ने उन्हें यहां लाकर जमीन में दफ़न कर दिया. अंग्रेजों ने इस जगह नूर हसन बाबा के नाम का मजार बना दिया. उनकी मजार पर आज भी दूर-दराज से लोग चादर डाल कर मन्नत मांगने आते हैं. नूर हसन बाबा की इच्छा के अनुसार यहां राधा-कृष्ण मंदिर एवं अर्ध निर्मित गुरुद्वारा बनवाया गया था.

आपके शहर से (रांची)

वर्ष 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद अंग्रेज इस जगह पर चर्च नहीं बनवा पाए. इस स्थल पर लकड़ी का एक क्रॉस लगा है. इस तरह अंग्रेजों ने यहां चारों धर्मों का सर्वधर्म स्थल बनवाने का काम किया.

बगल में है सीता कुंड

सर्वधर्म स्थल के बगल में एक कुंड है. मान्यता है कि त्रेता युग में माता सीता ने इस कुंड में स्नान किया था. इसलिए इसका नाम सीता कुंड पड़ा. यहां भगवान राम एवं लक्ष्मण की कई निशानियां भी थीं जो समय के साथ मिट चुकी हैं. सीताकुंड के ऊपरी हिस्से में अंग्रेजों का एक बड़ा बंगला जर्जर स्थिति में आज भी मौजूद है.हुं

जर्जर हालत में है मजार व मंदिर

यहां घूमने आई विदेशी सैलानी किट्टी ने कहा कि यह बहुत खूबसूरत जगह है. यहां चारों धर्मों के प्रतीक एक जगह मौजूद हैं. इसको देखते ही मन में अलग तरह की शांति मिलती है. लेकिन, इसको और डेवेलप किया जा सकता था ताकि यहां कुछ देर आराम से बैठा जा सके. सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है.

अगर आप यहां आना चाहते हैं तो सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे का का वक्त अच्छा है. यहां दोपहिया या चार पहिया वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है. इस जगह पहुंचने के लिए आप गूगल मैप का इस्तेमाल कर सकते हैं.

Tags: Gurudwara, Hindu Temple, Jharkhand news, Ranchi news

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