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विश्व साहित्य की बात आती है तो हिंदी में ऐसी तमाम कृतियां हैं जिन्होंने सफलता के झंड़े लहराये हैं. इनमें ‘राग दरबारी’, ‘मधुशाला’, ‘मैला आंचल’, ‘गोदान’ और ‘गुनाहों का देवता’ ऐसे उपन्यास हैं जिनकी लोकप्रियता समय बीतने के साथ और बढ़ रही है.
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‘गोदान’ प्रेमचंद की सर्वोत्तम कृति है. इसमें उन्होंने गांव और शहर की दो कथाओं का यथार्थ रूप और संतुलित मिश्रण प्रस्तुत किया है. मुंशी प्रेमचंद ने गोदान के पात्र ‘होरी’, ‘धनिया’ और ‘गोबर’ के माध्यम से भारतीय किसान के जीवन संघर्ष का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया है.
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‘मधुशाला’ हिंदी के प्रसिद्ध कवि और लेखक हरिवंश राय बच्चन की महत्वपूर्ण रचना है. हिंदी साहित्य की बेहद चर्चित कृति ‘मधुशाला’ में एक सौ पैंतीस रूबाइयां हैं. मधुशाला में सूफीवाद का दर्शन होता है.
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‘गुनाहों का देवता’ धर्मवीर भारती का सर्वाधिक पढ़े जाने वाले उपन्यासों में से एक है. यह एक अद्भुत प्रेम कहानी है. कहानी चन्दर , सुधा और पम्मी के इर्दगिर्द घूमती रहती है.
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‘मैला आंचल’ फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है. नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहां के जीवन का अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है.
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‘रागदरबारी’ विख्यात हिन्दी साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल की प्रसिद्ध व्यंग्य रचना है. यह ऐसा उपन्यास है जो गांव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्यहीनता को सहजता और निर्ममता से अनावृत करता है. शुरू से अन्त तक इतने निस्संग और सोद्देश्य व्यंग्य के साथ लिखा गया हिंदी का शायद यह पहला वृहत् उपन्यास है.
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