Home World Fumio Kishida India: भारत को दोस्‍त रूस से क्‍यों अलग करना चाहते हैं जापानी पीएम, जानें फुमियो किश‍िदा का प्‍लान

Fumio Kishida India: भारत को दोस्‍त रूस से क्‍यों अलग करना चाहते हैं जापानी पीएम, जानें फुमियो किश‍िदा का प्‍लान

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Fumio Kishida India: भारत को दोस्‍त रूस से क्‍यों अलग करना चाहते हैं जापानी पीएम, जानें फुमियो किश‍िदा का प्‍लान

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टोक्‍यो: जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने सोमवार में नई दिल्‍ली में अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। किशिदा उस देश का नेतृत्‍व करते हैं जिसके रिश्‍ते भारत के साथ पिछले कई दशकों से काफी अच्‍छे रहे हैं। ऐसे में उनके इस दौरे से काफी उम्‍मीदें हैं। मगर किशिदा ने भारत के सामने एक ऐसी मांग रख दी है जिसके बाद खुद पीएम मोदी कनफ्यूज हो गए हैं। इस नए प्‍लान पर भारत की प्रतिक्रिया कैसी होगी और इसका दोनों देशों के रिश्‍तों पर क्‍या असर पड़ेगा कोई नहीं जानता है। जापान वह देश है जो क्‍वाड में भारत, अमेरिका और ऑस्‍ट्रेलिया के साथ शामिल है। भारत के साथ उसके रिश्‍ते काफी पुराने हैं और ऐसे में वह भारत को नाराज करने का रिस्‍क नहीं लेगा।

पीएम किशिदा की एक ख्‍वाहिश
ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट की मानें तो किशिदा चाहते हैं कि भारत, यूक्रेन पर हमला करने के लिए रूस पर सख्‍त हो और उसे सजा दे। रूस, जो पांच दशकों से ज्‍यादा समय से भारत का रणनीतिक साझीदार है, उसके साथ दोस्‍ती खत्‍म करना नामुमकिन है। अब किशिदा चाहते हैं कि भारत, जापान और रूस में से किसी एक को चुने। रूस वह देश है जो भारत के लिए हथियार और ऊर्जा का बड़ा सप्‍लायर है। उनकी इस डिमांड के सामने भारत क्‍या करेगा, कोई नहीं जानता है।
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10 मार्च को किशिदा ने भारत दौरे का ऐलान करते हुए कहा था, ‘जी-7 और जी-20 देशों के नेताओं के तौर पर, मैं आपसी संपर्क मजबूत करने की कोशिशों को आगे बढ़ाना चाहता हूं।’ एक सीनियर जापानी अधिकारी के मुताबिक किशिदा, विकासशील देशों का नजरिया जानने के लिए भारत की स्थिति को समझना चाहते हैं। भारत इस बार जी-20 सम्‍मेलन का मेजबान है। इसके दो अहम सदस्‍य रूस और चीन ने उन कोशिशों का विरोध किया है जिसका मकसद यूक्रेन में जारी जंग की निंदा करना था।

रूस के खिलाफ जी-20 देश
जी-7 देशों के नेताओं की तरफ से हर बार यूक्रेन को समर्थन दिए जाने की बात कही गई है। जी-7 देश जी-20 के भी सदस्‍य हैं। ये देश उन तमाम उपायों पर चर्चा कर रहे हैं जिसके तहत रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन को रूस से निर्यात होने वाले कच्‍चे तेल की एक कीमत तय करने के लिए मजबूर किया जा सके। भारत और जी-20 के दूसरे देश रूस से भारी मात्रा में कच्‍चा तेल खरीद रहे हैं।
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भारत की कोशिशों के बाद भी फरवरी और मार्च में जब जी-20 की दो अहम मीटिंग्‍स हुईं तो रूस की तरफ से यूक्रेन पर हमले से जुड़े किसी भी नतीजे पर पहुंचने में कोई सफलता नहीं मिल सकी। भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से जापान की तरफ से की गई इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्‍पणी करने से इनकार कर दिया गया है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए नई न‍ीति
रूस से अलग किशिदा का मकसद दुश्‍मन चीन के खिलाफ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नई पहल को लॉन्‍च करना है। पिछले साल जून में किशिदा ने शांगरी-ला डायलॉग में कहा कि अगले साल तक शांति की योजना के लिए आजाद और खुले हिंद-प्रशांत से जुड़ी नीति को जारी करेंगे। जापान की तरफ से अगले तीन सालों में दो अरब डॉलर की रकम खर्च करेगा। किशिदा ने बताया था कि इस रकम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को गश्‍ती नाव और ऐसे कई उपकरणों से लैस किया जाएगा जो चीन का मुकाबला कर सकेंगे। जापान अपनी इस नई कोशिश में भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है।

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