Home Business FY22 में फसल बीमा के क्लेम में आई 48 फीसदी की गिरावट, क्या है वजह

FY22 में फसल बीमा के क्लेम में आई 48 फीसदी की गिरावट, क्या है वजह

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FY22 में फसल बीमा के क्लेम में आई 48 फीसदी की गिरावट, क्या है वजह

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नई दिल्ली. खेती में किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana- PMFBY) शुरू हुई थी. वहीं, आवेदनों की संख्या में बढ़ोतरी के बावजूद, पीएमएफबीवाई के माध्यम से भुगतान किए गए कुल क्लेम में 2021-22 में 48.77 फीसदी की कमी आई है. सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है.

2021-22 में 8.32 करोड़ बीमा क्लेम के एवज में 13,728.64 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. यह राशि 2020-21 में 6.23 करोड़ आवेदनों के लिए भुगतान किए गए 20,425.01 करोड़ रुपये से कम है.

स्कीम में कमियां कम भुगतान का मुख्य कारण
एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्कीम में कमियां कम भुगतान का मुख्य कारण हैं. मनीकंट्रोल से बातचीत में फूड और ट्रेड पॉलिसी एनालिस्ट देविंदर शर्मा ने कहा, ”योजना में एनरोलमेंट बैंकों के माध्यम से किया जाता है और यह बढ़ सकता है. लेकिन क्लेम को या तो खारिज कर दिया जाता है या उन्हें पूरा होने में इतना समय लगता है कि कई किसान योजना से उम्मीद खो देते हैं.”

इंपैनल्ड बीमा कंपनियों द्वारा एक मल्टी-एजेंसी फ्रेमवर्क के माध्यम से लागू
पीएमएफबीवाई केंद्रीय कृषि मंत्रालय और राज्य सरकारों के गाइडेंस में इंपैनल्ड बीमा कंपनियों द्वारा एक मल्टी-एजेंसी फ्रेमवर्क के माध्यम से लागू की गई है. किसी राज्य के लिए लागू करने वाली कंपनी का चयन उसकी सरकार द्वारा एक बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है.

पीएमएफबीवाई का इस्तेमाल बीमा कंपनियों द्वारा मुनाफा कमाने के लिए
आलोचकों का कहना है कि किसानों की मदद करने वाली योजना होने के बावजूद पीएमएफबीवाई का इस्तेमाल बीमा कंपनियों द्वारा मुनाफा कमाने के लिए किया जाता है. कृषि अर्थशास्त्री अवनीश कुमार ने कहा, ”किसान और सरकार बीमा कंपनियों को प्रीमियम के रूप में बड़ी राशि का भुगतान कर रहे हैं. लेकिन क्लेम का भुगतान कम है और अंतर को प्राइवेट बीमा कंपनियों द्वारा लाभ के रूप में पॉकेट में डाला जा रहा है.”

पीएमएफबीवाई वेबसाइट के मुताबिक, रबी और खरीफ दोनों फसलों के लिए 2021 के लिए ग्रॉस प्रीमियम 28,288.31 करोड़ रुपये था.

बीमा कंपनियों के पास पर्याप्त सर्वैअर नहीं
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर इकोनॉमिक स्टडीज एंड प्लानिंग के सहायक प्रोफेसर हिमांशु ने कहा, ”बीमा कंपनियां हमेशा लाभ को अधिकतम करने पर ध्यान फोकस करती हैं. इस योजना के नेचर को देखते हुए  किसान रिसिंविंग छोर पर हैं. ज्यादातर डेजिग्नेटेड बीमा कंपनियों के पास यह निर्धारित करने के लिए पर्याप्त सर्वैअर भी नहीं हैं कि क्लेम का भुगतान किया जाना चाहिए या नहीं.”

क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान साल 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की थी. इस योजना का मकसद प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और रोगों या किसी भी तरह से फसल के खराब होने की स्थिति में इंश्योरेंस कवर प्रदान करना है ताकि किसानों को आर्थिक घाटे की भरपाई हो जाए. इस योजना का लाभ फसल उगाने वाले पट्टेदार, जोतदार किसानों सहित सभी किसान उठा सकते हैं.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में हो सकता है बदलाव
बता दें कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव किया जा सकता है. इस बात की जानकारी कृषि सचिव मनोज आहूजा ने पिछले महीने (नवंबर 2022) दी थी. आहूजा ने कहा था कि हाल के जलवायु संकट और टेक्नोलॉजी के तेजी से विकास के मद्देनजर सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के फायदे के लिए बदलाव करने को तैयार है.

Tags: Business news, Business news in hindi, Farmer, Insurance, Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana

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