[ad_1]
ऐप पर पढ़ें
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट (HTLS) के सेशन के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने न्यायिक प्रक्रिया से लेकर निजी स्तर तक की बातें खुलकर साझा कीं। सीजेआई ने बताया कि किस तरह से अदालतों में महिलाओं और पिछड़ों की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा उन्होंने अपने शौक के बारे में बताया कि वह किताब पढ़ना और संगीत सुनना पसंद करते हैं। सीजेआई ने कहा कि अब पहले जैसा ट्रैवल करना भी संभव नहीं हो पाता। काम के सिलसिले में ही आना जाना हो पाता है। क्रिकेट के बारे में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि वह चाहते हैं भारतीय टीम वर्ल्ड कप जीते और अपना परचम लहराए।
सीजेआई ने कहा, मैं चाहता हूं कि भारतीय क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप जीते। मैं एक बात कहना चाहता हूं केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाओं की टीम भी उपलब्धि हासिल करे। मैं महिला टीम का भी प्रशंसक हूं। महिलाओं की टीम से मुझे जज के रूप में भी प्रेरणा मिलती है। उनका मासिक स्वास्थ्य और समभाव बने रहने का तरीका मुझे प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, हमारे जीवन का हर दिन सीखने के लिए होता है। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका के हेड के रूप में मेरा काम केवल फैसले करना ही नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था में सुधार करना भी है।
CJI ने कहा कि जज भी इंसान होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज सप्ताह में 200 केस सुनते हैं। ऐसे में उके सामने बैलेंस रखने की बड़ी चुनौती होती है। एक तरफ काम का बझ तो दूसरी तरफ चीजों को सुलझाने के लिए मानसिक कार्य। यह एक जज के सामने बड़ी समस्या होता है। एक जज को चाहिए कि कुछ समय खुद को देकर सोचे कि किस तरह के बदलाव की जरूरत है। इसके अलावा दिन में कम से कम 45 मिनट जरूर पढ़े। उन्होंने कहा, मेरे जीवन का यही मंत्र है. मैं किताब पढ़ता हू्ं और म्यूजिक सुनता हूं। इससे बड़ी शांति और ताकत मिलती है।
[ad_2]
Source link