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केरल में 5 साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या मामले को लेकर विपक्षी गुट INDIA के भीतर दरार पैदा हो गई है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात देने के टारगेट के आड़े क्षेत्रीय राजनीति आने लगी है। केरल के रेप और हत्या मामले को लेकर राज्य कांग्रेस ने सीपीएम के नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार पर तीखा हमला बोला है। स्टेट कांग्रेस की ओर से ट्वीट करके कहा गया, ‘केरल का गृह विभाग भ्रष्ट है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को इस्तीफा देना चाहिए। सीएम बच्चों के लिए भी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते।’
केरल कांग्रेस के वामपंथियों पर हमले से पता चलता है कि INDIA को एकजुट रखने की चुनौती कितनी बड़ी है। इससे पहले, पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा था। आम आदमी पार्टी नेता और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ भी दिल्ली कांग्रेस नेताओं के बयान आए हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा नेता विपक्षी गठबंधन का मजाक भी उड़ाने लगे हैं। बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि विपक्षी दलों के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) को अपना अस्तित्व खत्म करना होगा और एक नई पहचान हासिल करनी होगी। भले ही जो लोग इस नए गठबंधन का हिस्सा हैं, वे नहीं बदले हैं।
दुविधा में घिर गया वामपंथी दल
केरल में सत्ताधारी वामपंथी दल दुविधा का सामना कर रहा है। इस महीने की शुरुआत में बेंगलुरु में विपक्षी दलों का सम्मेलन हुआ था। इस मौके पर सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने बंगाल में TMC के साथ किसी भी गठबंधन से इनकार दिया। उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी और सीपीआई (एम) साथ नहीं होंगे। बंगाल में वामपंथियों और कांग्रेस के साथ धर्मनिरपेक्ष दल होंगे जो भाजपा व टीएमसी के खिलाफ लड़ेंगे।’ कांग्रेस नेता व पार्टी के बंगाल प्रमुख अधीर रंजन चौधरी ने पंचायत चुनावों के दौरान हिंसा को लेकर तृणमूल की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि राज्य में आतंक का राज है।
दिल्ली में AAP से भी दिखा टकराव
दिल्ली में कांग्रेस ने AAP के साथ अपने टकराव को नजरअंदाज कर दिया। कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक पर केंद्र के खिलाफ लड़ाई में अरविंद केजरीवाल की पार्टी का समर्थन किया। इसके बावजूद, अजय माकन जैसे स्थानीय नेता आप सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता INDIA की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित नहीं करेगी? साफ है कि भाजपा को आगामी लोकसभा चुनाव में मात देने के मकसद साथ आए विपक्षी दलों की चुनौती कम नहीं होने वाली है।
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