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इससे पहले 2021 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वॉशिंगटन प्रशासन कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच घटनाक्रम को ‘बहुत बारीकी’ से देख रहा है और अगर आवश्यक हो तो ‘मदद के लिए तैयार है’। भारत कश्मीर को एक द्विपक्षीय मामला मानता है और इससे संबंधित विवादों को सुलझाने के लिए वार्ता में किसी तीसरे पक्ष की दख़लंदाजी का विरोध करता है। भारत का साफ कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद नहीं रोकता, उसके साथ वार्ता संभव नहीं है। वहीं पाकिस्तान कश्मीर विवाद में तीसरे पक्ष को घसीटने के लिए तैयार है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज़ ज़हरा बलोच ने इस्लामाबाद में एक साप्ताहिक ब्रीफिंग में पत्रकारों से कहा, ‘जहां तक भारत-पाकिस्तान संबंधों और अमेरिका सहित तीसरे पक्षों की ओर से समाधान की बात है, पाकिस्तान ने हमेशा कहा है कि हम बातचीत को सुगम बनाने और भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद के समाधान सहित क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका का स्वागत करेंगे।’ प्रवक्ता अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत मसूद खान के हालिया बयान को लेकर एक सवाल का जवाब दे रही थीं जिसमें उन्होंने कश्मीर विवाद के समाधान के लिए संभावित अमेरिकी मध्यस्थता का संकेत दिया था।
क्या वाकई पाकिस्तान जाने वाले थे पीएम मोदी?
कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार ने दावा किया था कि 2020-21 में ऐसे हालात बन गए थे कि भारत-पाकिस्तान के बीच संबंध सामान्य हो जाते। पाकिस्तान के पत्रकार जावेद चौधरी ने अपने ऑडियो कॉलम में कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल 2021 में पाकिस्तान दौरे पर आने वाले थे। इस दौरान वह तत्कालीन पीएम इमरान खान से मुलाकात कर सकते थे। संभावना यह भी थी कि इस दौरान कश्मीर विवाद भी सुलझ जाता लेकिन आखिरी वक्त पर इमरान पीछे हट गए। शाह महमूद कुरैशी ने उनसे कहा कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो लोग कहेंगे कि आपने कश्मीर का सौदा कर दिया।’ हालांकि कहीं से भी इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है।
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