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हाइलाइट्स
जोशीमठ का क्षेत्र भूकंप के लिहाज से खतरनाक जोन-5 में आता है
माइक्रो सिस्मिक ऑब्जर्वेटरी से की जा सकेगी निगरानी
विशेषज्ञों ने चट्टानों में आने वाली चौड़ी दरारों की वजह भी बताई
नई दिल्ली. जोशीमठ संकट से पहाड़ों में दहशत का आलम है. सड़क से लेकर घरों तक में दरारें आने की वजह से मकान और व्यवसायिक प्रतिष्ठनों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं. इन दरारों से पानी भी निकलने लगा है, जिससे ऐसे मकानों में रहना मुश्किल हो गया. खतरनाक हो चुके ऐसी इमारतों को ढहाने का काम भी शुरू कर दिया गया है. इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि आखिर जोशीमठ में अचानक से चौड़ी-चौड़ी दरारें क्यों फटने लगीं? भविष्य में जोशीमठ को ऐसे संकट से कैसे बचाया जा सकता है और समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सकता है? मौजूदा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने जोशीमठ में माइक्रो सिस्मिक ऑब्जर्वेटरी लगाने का फैसला किया है, ताकि छोटी से छोटी भूकंप की घटना पर नजर रखी जा सके और उसके आधार पर उसके असर का विश्लेषण किया जा सके.
बता दें कि जोशीमठ भूकंप के लिहाज से सबसे खतरनाक जोन-5 में आता है. इसका मतलब यह है कि इस क्षेत्र में अक्सर भूकंप के झटके आते रहते हैं. आमतौर पर उस कंपन को लोग महसूस नहीं कर पाते हैं, लेकिन पहाड़ों और चट्टानों पर इसका व्यापक असर पड़ता है. इससे तनाव पैदा होता है. धीरे-धीरे इस तरह की घटनाएं बढ़ने से प्रभावित क्षेत्रों में इस तनाव की वजह से दरारें फट जाती हैं. विशेषज्ञों का मानान है कि जोशीमठ के मौजूदा संकट के लिए यह वजह काफी महत्वपूर्ण है. माइक्रो सिस्मिम वेधशालाएं खुलने से भू-वैज्ञानिक इस तरह की घटनाओं का विश्लेषण कर भविष्य में आने वाले संकट के बारे में पता लगा सकते हैं. पूर्व में जानकारी मिलने से इस तरह की समस्या से निपटने में काफी मदद मिल सकती है.
आपके शहर से (देहरादून)
केंद्र सरकार बुधवार (11 जनवरी 2023) को जोशीमठ में माइक्रो सिस्मिक वेधशाला इंस्टॉल करेगी. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इससे भू-विज्ञानियों को क्षेत्र का निरीक्षण करने में मदद मिलेगी. विश्लेषण के आधार पर क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर का सुरक्षित तरीके से विकास करने में सहायता मिलेगी. साथ ही ऐसे संकट के वक्त समय पूर्व कदम भी उठाए जा सकेंगे और सावधानी भी बरती जा सकेगी. जोशीमठ और आसपास के क्षेत्रों में लगातार भूकंप संबंधी गतिविधियां होती रहती हैं. इससे चट्टानें कमजोर होती जाती हैं. इससे दरारें उभर आती हैं. इसके बाद ज्यादा बारिश होने की वजह से पहाड़ों से आने वाला पानी इन दरारों में भरता जाता है. ऐसे में इन चट्टानों के गिरने की आशंका भी बढ़ जाती है.
देशभर में फिलहाल 152 सिस्मिक ऑब्जर्वेटरी हैं, जिससे प्राकृतिक घटनाओं की लगातार निगरानी की जा रही है. केंद्र ने अगले पांच साल में पूरे देश में ऐसी 100 और वेधशालाएं खोलने की योजना बनाई है. इसका उद्देश्य रियल टाइम डाटा संग्रह करना और उसके विश्लेषण के आधार पर कदम उठाना है.
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Tags: Joshimath news, National News, Natural calamity
FIRST PUBLISHED : January 11, 2023, 06:54 IST
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