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हाइलाइट्स
कैलाशहर विधानसभा सीट पर कांग्रेस लगा चुकी है जीत का छक्का
कांग्रेस ने दिग्गज नेता ब्राजीत सिन्हा को बनाया गठबंधन का प्रत्याशी
भाजपा ने सीपीएम छोड़कर आए सीटिंग विधायक मोहम्मद मोबूसर अली पर लगाया बड़ा दांव
कैलाशहर. त्रिपुरा राज्य (Tripura) की कैलाशहर विधानसभा सीट (Kailashahar Assembly Seat) बेहद ही अहम सीटों में मानी जाती है. इस सीट पर हमेशा से मुकाबला सीपीएम और कांग्रेस (Congress) के बीच ही रहता था. लेकिन 2018 का चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से सीपीएम और भाजपा के बीच हुआ था. इन चुनावों में कैलाशहर सीट (Kailashahar Seat) पर भी सीपीएम ने अपना कब्जा बरकरार रखा था. सीपीएम के मोहम्मद मोबूसर अली (Mohd. Moboshar Ali) ने भाजपा के नीतीश डे (NITISH DE) को 4,834 वोटों से हराकर जीता था. इस सीट पर कांग्रेस 1977 से 2018 तक 6 और सीपीएम 3 चुनाव जीत चुकी है. राज्य की सभी 60 सीटों पर चुनाव एक चरण में 16 फरवरी को होंगे और नतीजों की घोषणा 2 मार्च को होगी.
कैलाशहर विधानसभा सीट (Kailashahar Assembly Seat) पर साल 2018 के चुनावी मुकाबले में सीपीएम के मोहम्मद मोबूसर अली (Mohd. Moboshar Ali) को 18,093 मत यानी 45.47% वोट प्राप्त हुए थे और भाजपा के नीतीश डे (NITISH DE) को 13,259 वोट यानी 33.32% मत हासिल हुए थे जबकि दोनों के बीच जीत हार का बड़ा अंतराल 4,834 वोटों का रहा था. इस सीट पर तीसरे नंबर पर कांग्रेस के ब्राजीत सिन्हा (Birajit Sinha) रहे उनको मात्र 7,787 वोट (19.57%) हासिल हुई थीं.
साल 2013 का चुनाव कांग्रेस के ब्राजीत सिन्हा (Birajit Sinha) और सीपीएम के मोहम्मद मोबूसर अली (Moboshar Ali) के बीच हुआ था. गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले भी कांग्रेस के ब्राजीत सिन्हा ने 2008, 2003, 1998 और 1988 के चुनावों में जीत दर्ज की थी. इस सीट पर सीपीएम ने 1977, 1993 और 2018 के चुनाव ही जीते थे. कांग्रेस ने ब्राजीत सिन्हा (Birajit Sinha) को गठबंधन प्रत्याशी के रूप में उतारा है. भाजपा ने सीपीआई (एम) के सीटिंग विधायक मोहम्मद मोबूसर अली ( Moboshar Ali) को मैदान में उतारा है. तृणमूल कांग्रेस के मो. अब्दुल मतीन (MD. ABDUL MATIN) और एनसीपीआई (Nationalist Citizens Party of India) के जहांगीर अली (JAHANGIR ALI) भी चुनावी मैदान में डटे हैं.
राज्य में 1978 के बाद से सबसे ज्यादा राज सीपीएम का रहा
बताते चलें कि त्रिपुरा में 1978 के बाद से लेफ्ट पार्टी का ही सबसे ज्यादा कब्जा रहा है. 2018 से पहले एक बार 1988-93 के बीच भी लेफ्ट सत्ता से बाहर रही थी. बाकी सभी विधानसभा चुनावों में लेफ्ट ने अपना वर्चस्व बरकरार रखा है. 2018 में त्रिपुरा में भाजपा और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) गठबंधन को 60 सीटों में से 44 सीटों पर जीत मिली थी. बीजेपी के पास 36 सीटें आईं जबकि आईपीएफटी 8 सीटों पर कब्जा रहा था. दिलचस्प बात यह है कि इस गठबंधन ने प्रदेश की सभी 20 जनजातीय सुरक्षित (ST) विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी.
त्रिपुरा ईस्ट (ST) लोकसभा सीट पर BJP का कब्जा
कैलाशहर विधानसभा सीट (Kailashahar Assembly Seat) त्रिपुरा ईस्ट (एसटी) लोकसभा क्षेत्र (Tripura Lok Sabha Seat) के अंतर्गत है जहां से 2019 के चुनाव में भाजपा के रेबती त्रिपुरा (Rebati Tripura) ने जीत दर्ज की थी और 482126 वोट हासिल किए थे. कांग्रेस प्रत्याशी प्रज्ञादेबबर्मन (Pragya Debbarma) को 2 लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया था. लेफ्ट प्रत्याशी इस सीट पर तीसरे स्थान पर रहे थे.
राज्य के कुल वोटरों की संख्या 28.23 लाख
त्रिपुरा में 8 जिले हैं जिनमें धलाई, पश्चिम त्रिपुरा, उत्तर त्रिपुरा, दक्षिण त्रिपुरा, गोमती, खोवई, सिपाहीजाला, ऊनाकोटी प्रमुख रूप से शामिल हैं. त्रिपुरा में हिंदुओं की आबादी करीब 84 प्रतिशत है. बांग्ला यहां की मुख्य भाषा है और दुर्गा पूजा प्रमुख त्योहार है. राज्य के कुल मतदाताओं की बात करें तो यह 28,23,822 है. इसमें इस बार 10344 सर्विस वोटर भी शामिल हैं. सामान्य मतदाताओं की संख्या 28,13,478 है जिसमें 13,98,825 महिला मतदाता, दिव्यांग 17,297 और ट्रांसजेंडर वोटरों की संख्या 77 है. वहीं 18 साल के पहली बार वोटरों की संख्या 65,044 है.
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Tags: Assembly election, Tripura, Tripura Assembly Election
FIRST PUBLISHED : February 14, 2023, 09:21 IST
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