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UP Higher Education : तीन निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी

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UP Higher Education : तीन निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी

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कैबिनेट ने प्रदेश में निजी क्षेत्र के तीन निजी विश्वविद्यालयों जेएसएस विश्वविद्यालय नोएडा, सरोज इंटरनेशनल विश्वविद्यालय लखनऊ तथा शारदा विश्वविद्यालय आगरा की स्थापना संबंधी प्रस्ताव को हरी झंडी प्रदान कर दी है। गुरुवार को हुई कैबिनेट में ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (तृतीय संशोधन) अध्यादेश, 2024’ को प्रख्यापित कर प्रायोजक संस्था जेएसएस महाविद्यापीठ सी-20/1, सेक्टर 62-नोएडा को संचालन का प्राधिकार पत्र निर्गत किए जाने की मंजूरी दी गई है। साथ ही ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (तृतीय संशोधन) अध्यादेश, 2024’ के प्रतिस्थानी विधेयक के आलेख्य को विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर उसे राज्य विधान मण्डल में पारित कराने के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया गया है।

प्रायोजक संस्था सरोज सिंह शिक्षण संस्थान, लखनऊ द्वारा सरोज इन्टरनेशनल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना) नियमावली-2021 के प्रख्यापन के पश्चात प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। प्राप्त प्रस्ताव के परीक्षण के लिए शासन द्वारा कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय की अध्यक्षता में मूल्यांकन समिति का गठन किया गया था। मूल्यांकन समिति की आख्या के मद्देनज़र मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुति के आधार पर कैबिनेट के निर्णय के अनुपालन में प्रायोजक संस्था को आशय-पत्र निर्गत किया गया।

इसी प्रकार से प्रायोजक संस्था आनन्द स्वरूप एजुकेशनल ट्रस्ट आगरा द्वारा आगरा में शारदा विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना) नियमावली-2021 के तहत प्रस्तुत प्रस्ताव के परीक्षण के लिए कुलपति डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की अध्यक्षता में मूल्यांकन समिति का गठन किया गया था। इसकी रिपोर्ट के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुति के आधार पर कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की। 

इससे पहले प्रदेश सरकार ने सत्र 2023 से कई नए मेडिकल कॉलेेजों को शुरू करने की हरी झंडी दी थी। प्रदेश में शिक्षा के स्तर का बढ़ाने व लोकोन्मुखी करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

आपको बता दें कि हाल में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रबंधन संस्थान ने एमबीए कोर्स में धर्मनगरी श्री अयोध्या जी में हो रहे परिवर्तन, धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व को पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है।

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