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पेपर लीक के चलते यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा रद्द करने के बाद आरओ एआरओ एग्जाम को लेकर भी योगी सरकार ने दो बड़े फैसले लिए हैं। अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की समीक्षा अधिकारी / सहायक समीक्षा अधिकारी प्रारंभिक परीक्षा 2023 के पेपर लीक से जुड़ी शिकायतों की जांच शासन स्तर पर की जाएगी। यूपी सरकार के कार्मिक विभाग ने नोटिस जारी कर यह सूचना दी है। दूसरे फैसले के तहत विभाग ने कहा है कि अभ्यर्थी परीक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की शिकायत सबूतों के साथ विभाग की ईमेल आईडी secyappoint@nic.in पर 27 फरवरी तक भेज सकते हैं। यानी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा की तरह इसमें भी अभ्यर्थियों से सबूत मांगे गए हैं।
विभाग ने नोटिस में कहा, ‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वार 11 फरवरी को आयोजित की गई आरओ एआरओ परीक्षा 2023 के संबंध में शासन को संज्ञान में लाए गए तथ्यों और शिकायतों के मद्देनजर परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है कि परीक्षा के संबंध में प्राप्त शिकायतों का शासन स्तर पर परीक्षण किया जाए। सर्व साधारण को यह सूचित किया जाता है कि इस परीक्षा के संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत या इसकी शुचिता को प्रभावित करने वाले तथ्यों को संज्ञान में लाना चाहें तो वह अपना नाम और पूरा पता तथा साक्ष्यों सहित कार्मियों तथा नियुक्ति विभाग के ईमेल आईडी secyappoint@nic.in पर 27 फरवरी तक उपलब्ध करा सकते हैं।’
यूपीपीएससी आरओ एआरओ भर्ती परीक्षा 2023 में पेपर लीक का आरोप लगाते हुए प्रतियोगी छात्रों का प्रदर्शन कई दिनों से जारी था। पेपर लीक का विवाद दिनोंदिन तूल पकड़ता जा रहा था। शुक्रवार को देर रात उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के गेट के सामने अध्यक्ष संजय श्रीनेत्र से मिलने के लिए डटे रहे। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि आयोग को ईमेल पर साक्ष्य भेजे जा रहे हैं। कई प्रतियोगियों ने शपथपत्र के साथ ईमेल किया है। प्रतियोगी छात्र शपथपत्र के साथ साक्ष्य की हार्डकॉपी देने को भी तैयार हैं। जांच के लिए आयोग के पास सभी संसाधन भी उपलब्ध हैं तो आयोग परीक्षा निरस्त करने को लेकर निर्णय लेने में देरी क्यों कर रहा है। छात्रों ने कहा कि जब तक इस पर कोई निर्णय नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2023 में पेपर लीक का विवाद दिनोंदिन तूल पकड़ता जा रहा है। आक्रोशित युवाओं ने आयोग के सभी गेट बंद कराकर अध्यक्ष संजय श्रीनेत्र समेत आयोग के सदस्यों तथा सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बंधक बनने पर मजबूर कर दिया था। छात्र परीक्षा निरस्त करने और पुनर्परीक्षा कराने की मांग पर अड़े थे। उधर, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंक गांधी ने एक्स पर ट्वीट कर प्रतियोगी छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया था।
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