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हाइलाइट्स
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट यानी आंत बहुत ही संवेदनशील होती है जो सीधे दिमाग में भावनाओं को प्रभावित करती है.
आंत की जो लाइनिंग होती है उसका सीधा संबंध दिमाग से जुड़ा हुआ है.
Symptoms of Bad Gut Health: क्या आंत का संबंध दिमाग से हो सकता है. क्या कभी आपके पेट में तितली के हलचल मचाने की अनुभूति महसूस होती है. यह सब मजाक नहीं है क्योंकि हार्वर्ड हेल्थ के मुताबिक आंत का सीधा संबंध दिमाग के तार से जुड़ा हुआ है. अगर आंत में गंदगी ज्यादा हो जाए तो दिमाग की कई कोशिकाएं या हिस्से प्रभावित होते हैं और इससे कई तरह की परेशानियां बढ़ जाती है. रिपोर्ट के मुताबिक अगर पेट में खराबी है तो एंग्जाइटी, डिप्रेशन, चिंता, गुस्सा, बहुत अधिक उत्साह जैसी समस्या होने लगती है. या ज्यादा स्ट्रेस होने पर पेट से संबंधित बीमारियां हो सकती है. ये दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.
हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट यानी आंत बहुत ही संवेदनशील होती है जो सीधे दिमाग में भावनाओं को प्रभावित करती है. रिपोर्ट के मुताबिक अगर पेट खराब हो तो बहुत अधिक गुस्सा, एंग्जाइटी, बेचैनी, सेडनेस, अति उत्साह आदि जैसे लक्षण देखने को मिलता है, वहीं यदि ये सब लक्षण हैं तो इनसे पेट खराब की समस्या भी हो सकती है.
ब्रेन का किस तरह आंत से सीधा संबंध है
रिपोर्ट के मुताबिक दिमाग का सीधा असर पेट और आंत पर होता है. उदाहरण के लिए भोजन करने से पहले पेट से जूस निकलता है. यह जूस भोजन को पचाता है. जब पेट खराब रहता है तो यह दिमाग को सिग्नल देता है कि जूस न निकालें और जब दिमाग में स्ट्रेस या एंग्जाइटी रहता है तो यही से सिग्नल जाता है कि गैस्ट्रिक जूस न निकलें. यही कारण है कि जब पेट में समस्या होती है तब एंग्जाइटी, स्ट्रेस और डिप्रेशन भी शुरू हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आंत की जो लाइनिंग होती है उसका सीधा संबंध दिमाग से जुड़ा हुआ है.
पेट में समस्या होने के संकेत
1.गैस, ब्लॉटिंग- पेट में जब समस्याएं होती हैं तो कई तरह से आती है. इसमें पेट में गैस हो सकती है. ब्लॉटिंग और कब्ज परेशान कर सकता है. हार्टबर्न, डायरिया जैसी कई समस्याएं भी हो सकती है. इसका मतलब है कि आपकी आंत पर लोड बढ़ गया जो गंदगी को साफ करने में कमजोर हो रही है. इस तरह से गुड बैक्टीरिया की कमी हो जाती है और बैड बैक्टीरिया बहुत बढ़ जाती है.
2.एग्जाइटी-पेट में परेशानी के बाद एंग्जाइटी, डिप्रेशन, गुस्सा, अतिउत्साह जैसी समस्या आम है. जब भी पेट खराब होता है लोगों में इरीटेशन बहुत ज्यादा हो जाता है. खासकर तब जब कब्ज की समस्या से जूझ रहे हों.
3.नींद में कमी-आंत में ज्यादा परेशानी होने पर गैस, बदहजमी, डायरिया, ब्लॉटिंग आदि की परेशानी बढ़ जाती है. इसका सीधा असर नींद पर पड़ता है और रात की सही से नींद नहीं आ पाती है.
4. स्किन में परेशानी-अगर पेट गैस, ब्लॉटिंग, कब्ज जैसी समस्या हो तो इसका असर स्किन पर भी पड़ता है. इससे स्किन में एक्ने, एक्जिमा, सोरोसिस जैसी बीमारियां होने लगती है.
5. माइग्रेन-आंत का सीधा संबंध दिमाग में होने के कारण दिमाग से संबंधित कई परेशानियां सामने आती है. आंत में परेशानी होने पर माइग्रेन की समस्या हो सकती है. इसमें उल्टी या मतली के साथ माइग्रेन हो सकता है.
क्या करना चाहिए
आंत में ज्यादा गंदगी होने को नजरअंदाज न करें. पहले खान-पान सही करें. आमतौर पर गुड बैक्टीरिया की कमी हो जाने के कारण पेट से संबंधित परेशानियां होती है. इसके लिए प्रोबायोटिक का सेवन करें. लाइफस्टाइल को बदलें. ज्यादा मीठा न खाएं. धीरे-धीरे भोजन करें. प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, फास्ट फूड, ज्यादा तली-भुनी चीजों से दूरी बना लें. ज्यादा पानी पीएं. रोजाना एक्सरसाइज करें. सिगरेट, शराब से भी दूरी बना लें. दही, छाछ का सेवन बढ़ा लें. हरी पत्तीदार सब्जियों और सलाद का भी सेवन बढ़ा दें.
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Tags: Health, Health tips, Lifestyle
FIRST PUBLISHED : April 24, 2023, 05:40 IST
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