Home Health आई फ्लू के वायरस को तुरंत भगा देगा ये योग, दिन में बस 3 बार कर लें ये क्रिया

आई फ्लू के वायरस को तुरंत भगा देगा ये योग, दिन में बस 3 बार कर लें ये क्रिया

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आई फ्लू के वायरस को तुरंत भगा देगा ये योग, दिन में बस 3 बार कर लें ये क्रिया

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Eye Flu Yoga Treatment: आई फ्लू का संक्रमण अभी भी कम नहीं हुआ है. दिल्‍ली-एनसीआर सहित कई राज्‍यों में अभी भी लोग आंखों की इस संक्रामक बीमारी से जूझते हुए या तो अस्‍पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं या होम्‍योपैथी और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार के तरीकों को अपना रहे हैं. लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो इस बीमारी का सबसे बेहतर इलाज योग में मौजूद है. घर पर रहकर योग की सिर्फ एक क्रिया कर लेने से ही कंजक्‍टिवाइटिस के वायरस को कंट्रोल किया जा सकता है और इस रोग से छुटकारा पाया जा सकता है.

एसएम योग रिसर्च इंस्‍टीट्यूट एंड नेचुरोपैथी अस्‍पताल इंडिया के सचिव और शांति मार्ग द योगाश्रम अमेरिका के फाउंडर व सीईओ योगगुरु डॉ. बालमुकुंद शास्‍त्री कहते हैं कि योग इतना शक्तिशाली है कि यह शरीर की गंभीर बीमारियों को भी दूर कर सकता है, इसके साथ ही शरीर को किसी भी रोग के प्रति बुलेट प्रूफ बनाने का काम करता है. जो लोग नियमित योग क्रियाएं करते हैं वे इस चीज को महसूस कर पाते हैं लेकिन जो लोग योगासन या प्राणायाम रेगुलर नहीं करते हैं वे बीमारियों के दौरान भी अगर इन्‍हें सही तरीके से करके लाभ उठा सकते हैं.

आजकल चल रहा आई फ्लू आंखों में संक्रमण की एक सामान्‍य बीमारी है, जिसे योग की जल नेति और सूत्र नेति क्रियाओं के द्वारा ठीक किया जा सकता है. डॉ. बालमुकुंद कहते हैं कि इनमें भी सूत्र नेति या रबर नेति क्रिया इतनी फायदेमंद है कि, अगर इसे एक दिन में ही सिर्फ 3 बार कर लिया जाए तो कुछ ही घंटों में आई फ्लू जैसी बीमारियों पर असर दिखान शुरू हो जाता है.

डॉ. कहते हैं कि आंख में एक लैक्रिमल ग्‍लैंड होती है जो नियमित रूप से आंसू यानि फ्लुड निकालती है जो आंख को साफ करने के साथ ही उसे प्रोटेक्‍ट करते हैं. ऐसे में जब सूत्र नेति क्रिया में धागे या रबर को नाक से डालकर मुंह से बाहर निकालकर रगड़ा जाता है तो आंखों की ऑप्टिक नर्व से लेकर लैक्रिमल ग्‍लैंड पर प्रभाव पड़ता है, यहां सक्रियता बढ़ जाती है, पूरी गंदगी बाहर निकल जाती है. इससे आंखों की रोशनी बढ़ने के साथ ही आंखों की आई फ्लू जैसी अन्‍य कई बीमारियां भी ठीक होने लगती हैं.

सूत्र नेति क्रिया बेहद साधारण है. अगर कोई व्‍यक्ति एक बार इस क्रिया को कर लेता है तो फिर उसे दोबारा इसे करने में कोई परेशानी नहीं होती है. सूत्र नेति क्रिया में सूत का एक धागा होता है, हालांकि आजकल आसानी के लिए इसकी जगह पर रबर का इस्‍तेमाल किया जा रहा है. इसे नासिका के एक छिद्र से अंदर डाला जाता है और मुंह से बाहर निकाला जाता है. यह प्रक्रिया देखने में कठिन लगती है लेकिन है नहीं.

. सबसे पहले नेति वाले सूत्र यानि धागे या रबर को गर्म पानी में भिगो दें, ताकि यह नर्म हो जाए.
. उसके बाद अपनी नाक के दोनों छिद्रों में से एक में नेति वाली रबर या धागा अंदर प्रवेश कराएं.
. धीरे-धीरे यह धागा या रबर नाक से अंदर जाने लगेगा तो आपको हल्‍का सरदर्द या छींक आने जैसा महसूस होगा लेकिन इस प्रक्रिया को रोकें नहीं और रबर को अंदर डालते जाएं.
. जब यह धागा नाक से नीचे यानि गले में आ जाए तो अपनी शुरुआती दो उंगलियों तर्जनी और मध्‍यमा को मुंह के अंदर डालकर इस रबर को बाहर निकाल लें. अब रबर का ए‍क सिरा नाक के बाहर और दूसरा सिरा मुंह के बाहर होगा.
. नाक और मुंह के बाहर आए दोनों सिरों को पकड़कर अब कम से कम 4 बार या ज्‍यादा से ज्‍यादा 25 बार आगे पीछ़े रगड़ें.
. इसे बाहर निकालकर कुल्‍ला करें और नासिका के दोनों छिद्रों में गाय का शुद्ध घी डालें.

डॉ. बालमुकुंद कहते हैं कि लोगों के मन में इस योग क्रिया को लेकर एक भ्रांति है कि सूत्र नेति का धागा अगर सावधानी से न डाला जाए तो ऊपर मस्तिष्‍क में भी पहुंच सकता है, जबकि यह गलत है, ऊपर की ओर कोई रास्‍ता ही नहीं होता. सिर्फ एक रास्‍ता नाक से मुंह की ओर जाता है और रबर या धागा उसी दिशा में आगे बढ़ता है. कभी-कभी किसी व्‍यक्ति के नाक से खून आ जाता है लेकिन यह भी घबराने की बात नहीं है, अगर ऐसा हो तो इस क्रिया के बाद नाक में गाय का शुद्ध घी डाल लें और उसके बाद अगले दिन फिर से आप इस क्रिया को करने के लिए तैयार हैं. यह नाक, आंख और सिर की कई बीमारियों में बेहद फायदेमंद है.

Tags: Eyes, Trending news, Yoga

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