[ad_1]
हाइलाइट्स
पंचक का प्रारंभ आज दोपहर 01:38 बजे से हो रहा है और आज भद्रा भी थी.
अशुभ नक्षत्रों के योग से पंचक बनता है.
आज 6 जुलाई गुरुवार से ‘दोषरहित’ पंचक लग रहा है. यह जुलाई और श्रावण मास का पंचक है. दोषरहित पंचक का अर्थ है, वह पंचक जो दोष मुक्त हो. यह पंचक 6 जुलाई से लेकर 10 जुलाई तक है. 10 जुलाई को सावन का पहला सोमवार व्रत है. पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा, छत डलवाने समेत कई कार्यों को करने की मनाही होती है. लेकिन जिस दिन से पंचक प्रारंभ होता है, उस आधार पर उसका प्रभाव देखा जाता है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं पंचक के प्रारंभ और समापन का समय क्या है? इस पंचक का क्या असर होगा?
क्या है ‘दोषरहित’ पंचक?
पंचांग के अनुसार, जो पंचक बुधवार और गुरुवार को प्रारंभ होता है. वह दोषरहित पंचक होता है क्योंकि उस पंचक में शुभ कार्यों को करने की मनाही नहीं होती है. ऐसे पंचक का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है.
यह भी पढ़ें: आप भी शिवलिंग पर चढ़ाते हैं उल्टा बेलपत्र? क्या है सही तरीका? जानें बेलपत्र चढ़ाने का नियम, मंत्र
पंचक 2023 प्रांरभ से समापन तक
पंचांग के आधार पर देखा जाए तो पंचक का प्रारंभ आज दोपहर 01:38 बजे से हो रहा है और आज भद्रा भी थी. पंचके तीसरे और चौथे दिन भी भद्रा का वास है. ये दोनों ही भद्रा पृथ्वी लोक की हैं. भद्रा में शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है.
6 जुलाई, गुरुवार: पंचक प्रारंभ, समय: दोपहर 01:38 बजे से कल सुबह 05:29 बजे तक, भद्रा: सुबह 05:29 बजे से सुबह 06:30 बजे तक
7 जुलाई, शुक्रवार: पंचक पूरे दिन
8 जुलाई, शनिवार: पंचक पूरे दिन, भद्रा: रात 09:51 बजे से अगले दिन सुबह 05:30 बजे तक
9 जुलाई, रविवार: पंचक पूरे दिन, भद्रा: सुबह 05:30 बजे से सुबह 08:50 बजे तक
10 जुलाई, सोमवार: पंचक सुबह 05:30 बजे से शाम 06:59 बजे तक
यह भी पढ़ें: जुलाई में शुक्र-बुध की युति, बनेगा लक्ष्मी नारायण योग, 3 राशिवालों को जमकर होगा धन लाभ, कर्ज से मिलेगी मुक्ति
पंचक से जुड़ी 5 महत्वपूर्ण बातें
1. अशुभ नक्षत्रों के योग से पंचक बनता है. जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में हो, धनिष्ठा नक्षत्र, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में भ्रमण करता है तो उस समय को पंचक कहते हैं.
2. यदि पंचक शनिवार को प्रारंभ हो रहा है तो उसे मृत्यु पंचक कहते हैं, यदि पंचक रविवार से प्रारंभ होता है तो वह रोग पंचक कहलाता है.
3. शुक्रवार दिन से शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहा जाता है, वहीं सोमवार को शुरू हुआ पंचक राज पंचक और मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है.
4. पंचक के समय में अग्नि से भय, धन हानि, रोग होने, आर्थिक दंड और पारिवार में कलह होने की आशंका रहती है.
5. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक में किसी की मृत्यु होती है तो किसी योग्य पंडित की सलाह पर गुरुड़ पुराण में बताई गई विधि अनुसार ही अंतिम संस्कार कराना चाहिए. इससे पंचक का दोष खत्म हो जाता है.
.
Tags: Astrology, Dharma Aastha
FIRST PUBLISHED : July 06, 2023, 12:06 IST
[ad_2]
Source link